ललितपुर ब्यूरो:

नगर की पेयजल व्यवस्था को प्राण शून्य बता कांग्रेसियों ने अन्तिम यात्रा निकाल पंचतत्व में विलीन कर दिया। जिले में व्याप्त पेयजल संकट को लेकर कांग्रेस आन्दोलित है। तीन दिवसीय आन्दोलन के अन्तिम दिवस जिलाध्यक्ष दुर्गाप्रसाद कुशवाहा की अगुवाई में घण्टाघर पर एकत्र हुए। यहाँ बाकायदा जल संस्थान और जलनिगम के शव बनाए गए और सदरकाँटा से शव यात्रा की शुरूआत की गई, जो नझाई बाजार होते हुए वाटर व‌र्क्स पहुँची। यहाँ शव को मुखागिन् देकर पंचतत्व में विलीन किया गया। इस दौरान 'योगी मोदी की सरकार, बन्द करो यह अत्याचार' 'आश्वासन नहीं पेयजल चाहिए, जीने का अधिकार चाहिए' जैसे नारे लगाए जा रहे थे। शासन और प्रशासन पर भड़ास निकालते हुए कहा गया कि जिला प्रशासन पेयजल समस्या को गम्भीरता से नहीं ले रहा है। वहीं सत्ता में काबिज सत्तारूढ़ भी कोई अंकुश नहीं लगा पा रहे है। वहीं जिले के बहुत से क्षेत्र की जनता बूँद-बूँद पानी के लिए तरस रही है। शव यात्रा के बाद जिलाधिकारी को सम्बोधित ज्ञापन एसडीएम सदर को सौंपा गया। इसमें बताया गया कि बुन्देलखण्ड के अति पिछड़े जिले में पानी के पर्याप्त साधन है। देश में सर्वाधिक बाँध जिला ललितपुर में ही है। क्षेत्र की सासद केन्द्रीय केबिनेट मन्त्री है और प्रदेश सरकार में जिले के विधायक राज्यमन्त्री और ललितपुर विधायक भी सत्तारूढ़ दल के हैं। इसके बाद भी ललितपुर के वाशिन्दों की प्यास बुझाने को पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, जबकि अन्य औद्योगिक उपक्रमों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने माँग की कि पेयजल आपूर्ति दुरुस्त करने के लिए अधीनस्थों को आवश्यक दिशा निर्देश देकर जनता के प्यासे कण्ठों को पानी पहुँचाया जाए।

ज्ञापन देने वालों में जिलाध्यक्ष दुर्गाप्रसाद कुशवाहा, नगराध्यक्ष हरिबाबू शर्मा, जिला महासचिव अजय प्रताप सिंह तोमर, बहादुर सिंह, विनोद, रितेश जैन, समद खान, बलवन्त सिंह राजपूत, ऊदल सिंह पटेल, रामगोपाल अहिरवार एड, मोण्टी शुक्ला, अंकित यादव, जगभान सिंह, मुहम्मद आशिफ, बिट्टू राजा, नाती राजा, प्रदीप रिछारिया, मुहम्मद जलील, साबिर, उवेश खान, डॉ. सुनील जैन खजुरिया शामिल रहे।

Posted By: Jagran

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