12 में से मात्र 5 ही हो सके स्वीकृत, सात रह गए शेष

जनपद में बालू खनन के लिए नहीं दिखा कारोबारियों में उत्साह

खनिज विभाग द्वारा ई-टेण्डरिग से कई बार माँगे जा चुके है आवेदन

ललितपुर ब्यूरो :

विभाग के तमाम प्रयास ललितपुर के खनिज कारोबारियों पर प्रभाव नहीं छोड़ पा रहे है। यही वजह है कि बालू के बार-बार टेण्डर आमंत्रित किए जाने के बाद भी 12 खनन परमिट पूरे आवण्टित नहीं किए जा सके है। 12 में मात्र पाँच घाटो के लिए खनन परमिट हेतु आवेदन प्राप्त कर स्वीकृत किया गया। शेष के लिए किसी ने भी रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद डीएम की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा इन घाटों में पात्र का चयन कर परमिट स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गयी है। फिलहाल घाटों के प्रति खनिज कारोबारियों का रुख यहाँ बिल्कुल भी नहीं दिख रहा है।

जनपद में अवैध खनन का कारोबार काफी पुराना है। भले ही यहाँ बड़ी मात्रा में बालू का कोई सेण्टर न हो, लेकिन यहाँ छोटे-मोटे जो घाट है, वहाँ से ही खनन माफिया अवैध तरीके से बालू निकालकर इसकी विभिन्न जगह सप्लाई कर रहे थे। इस कार्य में विभागीय कर्मियों की मिलीभगत कहे तो कोई बड़ी बात नहीं। यह तो रही जिले की बात। प्रदेश का शायद ही ऐसा कोई जिला हो, जहाँ अवैध खनन की शिकायत न हो। पूर्व सरकार में यह खेल धड़ल्ले से चला। हाइकोर्ट ने इस पर सख्ती हेतु सीबीआइ को निर्देश दिए। बावजूद इसके इस पर कोई रोक नहीं लग सकी। इसके बाद सत्ता परिवर्तन हुआ, प्रदेश में योगी सरकार काबिज हुई और सरकार ने सबसे पहले अवैध खनन पर शिकंजा कसना शुरू किया और अवैध खनन पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। नई खनन नीति तैयार कर पहले छह-छह माह के अल्पकालीन परमिट जारी करने की रणनीति तैयार की। जिसके फलस्वरूप जनपद ललितपुर में भी तीनों तहसीलों ललितपुर, महरौनी व तालबेहट क्षेत्र में कुल 12 घाटों पर 91 एकड़ क्षेत्र को खनन के लिए चयनित किया गया। इन घाटों के प्रति भी लोग उत्साहित नहीं दिखे। 12 घाटों में इनमें भी पूरे नहीं हो सके। छह माह पूर्ण हो जाने के बाद, बालू पट्टों के लिए पाँच वर्षीय पट्टों का प्रावधान आया। विभाग द्वारा ई-टेण्डर के माध्यम से 5 वर्षीय बालू के घाटों के टेण्डर आमंत्रित किए गए। विभाग को लगा कि छह माह वाले घाट नहीं हुए, शायद पाँच साला वाले घाटों में शायद पूर्ति हो जाए। ई-टेण्डरिग के माध्यम से अपनाई गई प्रक्रिया में खनिज कारोबारियों ने एक बार फिर इन घाटों को नकार दिया। बार-बार टेण्डर किए जाने के बाद भी टेण्डरों को पूर्ण नहीं किया जा सका। 12 घाटों में किसी तरह 5 घाटों के टेण्डर आए और उन्हे स्वीकृत किया गया। ऐसा नहीं है कि विभाग घाटों के आवण्टन के लिए प्रयास न कर रहा हो, बावजूद इसके कारोबारियों का रुख इन घाटों के प्रति नकारात्मक है। ऐसे में विभाग द्वारा घाटों के लिए आवण्टन के लिए किए जा रहे प्रयास विफल हो जा रहे है। अब देखना यह है कि आगामी प्रक्रिया में विभाग कितने और बालू के पट्टों को स्वीकृत करा सकने में कामयाब होता है।

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बॉक्स में -

यह घाट हुए स्वीकृत

तहसील गाँव

तालबेहट पूराकलाँ

महरौनी वीर

तालबेहट बलरगना

ललितपुर पाचोनी -

तालबेहट धमना -

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बॉक्स में -

बालू खनन की मात्रा पर्याप्त न होना प्रमुख कारण

जानकारों के मुताबिक जनपद ललितपुर में नदियों का बहाव उतना नहीं है, जितना कि और जनपदों में। वह तो यह तक कहते है कि यह नदियाँ नहीं, नाले है और इनमें विभाग द्वारा घाट तैयार कर बालू निकलवाई जाने की योजना है और वो भी इतने अत्यधिक दाम निर्धारित कर। उनका कहना है कि वह टेण्डर भर भी दें और इतनी अत्यधिक रकम फँसा दें, लेकिन उतनी मात्रा में उन्हे बालू नहीं निकाल पाना है जितनी कि रकम जमा हो जाना है। व्यक्ति मुनाफे के लिए कोई धधा करता है, यह धधा तो उन्हे नुकसान का धधा महसूस हो रहा है। और तो और घाट से वह केवल तीन माह तक ही बालू निकाल सकेंगे, उसके बाद बारिश का सीजन शुरू हो जाएगा और इन नदियों में पानी आ जाने के कारण वह इससे बालू नहीं निकाल सकेंगे। यह सब कारण बालू के घाटों में टेण्डर के लिए कारोबारियों में रुचि न लेने का प्रमुख कारण है।

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बॉक्स में -

घाटों से निकलेगी बालू, गति पकड़ेंगे निर्माण कार्य

जनपद में 12 घाटों के प्रस्ताव तैयार कर इनके लिए खनन पट्टो के लिए ई-टेण्डर के माध्यम से आवेदन माँगे गए थे। लेकिन पाँच घाट ही रहे, जिनके लिए खनन पट्टा जारी करने हेतु स्वीकृति बनी, शेष पर पट्टा स्वीकृत नहीं हुआ। भले ही पाँच घाट स्वीकृत किए, लेकिन अवैध खनन से तो ठीक। विभाग को इन पट्टों से न केवल राजस्व की प्राप्ति हुई, बल्कि बालू का उत्खनन होने से यहाँ पर बालू आसानी से उपलब्ध हो जाएगी और यहाँ ठप पड़े निर्माण कार्य गति पकड़ेंगे। जल्द ही ललितपुर जनपद में बालू की मात्रा पर्याप्त उपलब्ध दिखाई देगी।

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बॉक्स में -

शेष पट्टों के लिए फिर से होंगे आवेदन

12 घाटों में 5 के लिए पट्टे स्वीकृत कर दिए गए, लेकिन 7 घाटों पर पट्टे नहीं हो सके। अब इन घाटों के लिए आगामी प्रक्रिया अपनाते हुए फिर से ई-टेण्डर होंगे और इसके बाद ही इन्हें स्वीकृत किए जाने की येाजना है। हालाँकि विभाग की अभी इस दिशा में कोई कार्ययोजना नहीं है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक इन घाटों के लिए खनन हेतु जल्द ही टेण्डर जारी किए जाएंगे। जिसके बाद जो भी इन्हे प्राप्त करेगा, उन्हे पाँच साल तक खनन के लिए पट्टे जारी किए जाएंगे।

Posted By: Jagran

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