ललितपुर ब्यूरो : खेतों की तस्वीर बदलने व मिट्टी में मौजूद आवश्यक पोषक तत्वो की कमी पता करने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा संचालित की जा रही महत्वाकाक्षी प्रधानमन्त्राी मृदा स्वास्थ्य परीक्षण योजना काफी कारगर साबित हो रही है। इस योजना के तहत कृषि विभाग के कर्मचारी खेतों से मिट्टी के नमूने लेकर प्रयोगशाला में उनका परीक्षण करते है। इसके बाद किसान को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से खेत की मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी की जानकारी दी जाती है। बाद में किसान उक्त पोषक तत्व खेत में डालकर उत्पादन क्षमता बढ़ाते है।

शासन की मंशा है कि किसानों को खेती के प्रति जागरुक और प्रेरित किया जाये। साथ ही उन्हे वैज्ञानिक तकनीक से खेती की नई-नई जानकारिया दी जायें। इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री मृदा स्वास्थ्य परीक्षण योजना कई वर्षाें से संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत कृषि विभाग के कर्मी खेतों में जाकर मिट्टी के नमूने लेते है। खेत से नमूने लेने का भी अपना अलग तरीका है। खेत की मेड़ से एक मीटर अन्दर और खेत के चारों कोनों व बीच से कुल 5 स्थानों से मिट्टी का नमूना लिया जाता है। नमूने की मिट्टी में आपस में मिलाकर उसके चार भाग किये जाते है। दो भाग अलग कर दिये जाते है, जबकि शेष बचे दो भाग में से एक कर्मी पॉलीथिन में भरकर अपने पास रख लेते हैं, तो वहीं दूसरा भाग किसान अपने पास रख लेता है। इस प्रक्रिया के तहत हर जगह से पाँच-पाँच ग्राम मिट्टी लेनी होती है। इसके बाद कागजी प्रक्रिया के तहत किसान का नाम, पता, खसरा नम्बर, लिखा जाता है। बाद में इस मिट्टी का परीक्षण कृषि विभाग की प्रयोगशाला में किया जाता है। परीक्षण के दौरान इस बात को पता लगा लिया जाता है कि खेत की मिट्टी में कौन-कौन से पोषक तत्वों की कमी है और कौन-कौन से तत्व मौजूद है। इसके बाद मृदा स्वास्थ्य कार्ड तैयार किया जाता है। जिसमें मौजूद तत्वों व कमी का उल्लेख किया जाता है। इसके बाद गाव-गाव में शिविर लगाकर मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किये जाते है। इस दौरान किसानों को स्वास्थ्य कार्ड के हिसाब से खेत में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के तरीके बताये जाते है। साथ ही रासायनिक खादों का प्रयोग कम करने के साथ-साथ अन्य खेती से सम्बन्धित महत्वपूर्ण बाते बतायी जाती है। मौजूदा समय में कृषि विभाग के कर्मी मिट्टी से नमूने लेकर स्वास्थ्य कार्ड तैयार कर रहे है, जिन्हे गाँव-गाँव में शिविर लगाकर वितरित भी किया जा रहा है।

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इनका कहना है

मृदा स्वास्थ्य कार्ड से खेत में मौजूद मिट्टी के पोषक तत्वों की कमी का पता चलता है। स्वास्थ्य कार्ड वितरण के दौरान किसानों को पोषक तत्वों की कमी पूरा करने के लिए जानकारी दी जाती है। पोषक तत्वों की पूर्ति से खेत की उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। मिट्टी का परीक्षण कराना बेहद जरूरी है।

संतोष कुमार सविता

उप कृषि निदेशक, ललितपुर।

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मिट्टी में जरूरी है ये पोषक तत्व

कृषि विभाग के विषय वस्तु विशेषज्ञ रामबिहारी निरजन बताते है कि खेत की मिट्टी में सल्फर, जिंक, लोहा, कॉपर, मैगनीज, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटास, कैल्शियम, मैगन्ीशियम, जस्ता, मौलीबिडनम, क्लोरीन, गंधक आदि पोषक तत्व पाये जाते है।

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फसल कटाई के बाद लिये जाते हैं नमूने

मृदा स्वास्थ्य कार्ड के लिए फसल कटाई के बाद मिट्टी के नमूने लिये जाते है। रबी की फसल कटाई के बाद अप्रैल से जून तक व खरीफ की फसल कटाई होने के पश्चात अक्टूबर-नवम्बर माह में मिट्टी के नमूने लिये जाते है।

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ये कर्मी लेते है मिट्टी के नमूने

कृषि विभाग के सहायक तकनीकि मैनेजर, ब्लॉक टेक्नीकल मैनेजर व प्राविधिक सहायक खेतों से मिट्टी के नमूने लेते है। इसके बाद नमूने को प्रयोगशाला भेजा जाता है, जहा इनका परीक्षण किया जाता है।

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मानक के अनुसार लेते नमूने

मिट्टी के नमूने लेने से पूर्व उस क्षेत्र के नक्शा का अध्ययन किया जाता है। ग्रिड के हिसाब से सिंचित भूमि को ढाई हैक्टेयर व असिंचित भूमि को 10 हैक्टेयर के हिसाब से लेकर आकलन किया जाता है।

Posted By: Jagran

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