शारदा नदी का कहर: करोड़ों की परियोजना क्षतिग्रस्त, फिर खतरे में आया बंझेड़ा गांव
शारदा नदी का कटान तेज होने से लखीमपुर खीरी के बंझेड़ा गांव में करोड़ों की सुरक्षा परियोजना का 40 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है।
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HighLights
शारदा नदी ने बंझेड़ा गांव की परियोजना का 40 मीटर हिस्सा तोड़ा।
छह करोड़ की लागत से बनी परियोजना पिछले साल भी क्षतिग्रस्त हुई थी।
ग्रामीणों में गांव के अस्तित्व को लेकर गंभीर चिंता बढ़ गई है।
पवन जायसवाल, लखीमपुर। शारदा नदी का जलस्तर कम होते ही कटान का कहर तेज हो गया है। गोला विधानसभा क्षेत्र के बंझेड़ा गांव के किनारे ग्रामीणों को बाढ़ और कटान से बचाने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई परियोजना अब खुद शारदा की चपेट में आ गई है। बीती रात नदी के बढ़े दबाव के चलते परियोजना का करीब चालीस मीटर हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इससे ग्रामीणों में एक बार फिर गांव के अस्तित्व को लेकर चिंता बढ़ गई है।
बताया जाता है कि पिछले वर्षों में शारदा के गांव की ओर लगातार बढ़ते रुख को देखते हुए करीब छह करोड़ रुपये की लागत से लगभग सात सौ मीटर लंबी परियोजना का निर्माण कराया गया था।
इसका उद्देश्य बंझेड़ा गांव और आसपास की आबादी को नदी के कटान से सुरक्षित रखना था, लेकिन पिछले वर्ष भी नदी के तेज दबाव के चलते परियोजना का करीब पचास मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने का खामियाजा इस बार फिर सामने आने लगा है।
बीती रात शारदा का दबाव अचानक बढ़ा और परियोजना का करीब चालीस मीटर हिस्सा नदी में क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद कटान का दबाव परियोजना के आगे भी बढ़ने लगा। हालात बिगड़ते देख ग्रामीणों ने तत्काल अधिकारियों को सूचना दी। सूचना के बाद बाढ़खंड विभाग की टीम आनन-फानन में परियोजना को बचाने के प्रयास में जुट गई।
निगरानी और कार्ययोजना पर सवाल
करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद परियोजना का बार-बार क्षतिग्रस्त होना विभागीय निगरानी और कार्ययोजना पर सवाल खड़े कर रहा है। पिछले वर्ष हुए नुकसान के बाद यदि समय रहते कमजोर हिस्सों को मजबूत किया जाता तो इस बार नुकसान को रोका जा सकता था।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी का रुख लगातार गांव की ओर बढ़ रहा है, लेकिन विभाग स्थायी समाधान के बजाय कटान शुरू होने के बाद ही सक्रिय होता है। परियोजना के पश्चिम दिशा में शारदा अब कृषि भूमि और फसलों को भी अपनी जद में ले रही है। नदी लगातार जमीन काटते हुए आगे बढ़ रही है।
वहीं, गांव के किनारे बना तटबंध शारदा की धार से लगातार टकरा रहा है और फिलहाल गांव को बचाने की कोशिश में जुटा है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि कटान इसी गति से जारी रहा तो आने वाले दिनों में बंझेड़ा गांव पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
बझेड़ा में जो परियोजना बीते सालों में लगी थी जिससे बंझेड़ा गांव को बचाया गया था, चूंकि दैवीय आपदा के आगे किसी का जोर नहीं है, बाकी उसकी रोकथाम के लिए काम किया जा रहा है।
-अमन अरविंद गिरी, विधायक, गोलागोकर्ण नाथ
