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लखीमपुर खीरी में शारदा नदी के उफान से कटान तेज, नदी में समाया सैकड़ों वर्ष पुराना देवी माता का मंदिर

Published: Wed, 30 Sep 2026 07:39 PM (IST)

Flood in Lakhimpur Kheri: ग्रामीणों का कहना है कि इसी बाढ़ में वीर बाबा और शिव मंदिर भी शारदा की ...और पढ़ें

HighLights

  1. नदी की तेज कटान की चपेट में वीर बाबा और शिव मंदिर

  2. सुबह शारदा नदी का कटान में अचानक आ गई तेजी

संवाद सूत्र, लखीमपुर : बिजुआ क्षेत्र के रुरा सुल्तानपुर में शारदा नदी की कटान लगातार तेज होती जा रहा है। बुधवार सुबह कटान की चपेट में आने से वीर बाबा स्थान पर वर्षों पुराना देवी माता का मंदिर देखते ही देखते नदी की धारा में समा गया।

गोला तहसील के रूरा सुल्तानपुर गांव में शारदा नदी की तेज धारा में वर्षों पुराना दुर्गा मंदिर देखते ही देखते समा गया। ग्रामीण लंबे समय से इस मंदिर में पूजा-अर्चना करते आ रहे थे। नदी पहले ही गांव के कई मकानों को अपनी चपेट में ले चुकी है। इस मंदिर के नदी में समाने के दौरान ग्रामीण जयकारे लगाते रहे।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस मंदिर के नदी में विलीन होने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि इसी बाढ़ में वीर बाबा और शिव मंदिर भी शारदा की कटान में समा चुके हैं। अब पूरा धार्मिक स्थल नदी की धारा की जद में आ गया है।

शारदा नदी की कटान बुधवार सुबह करीब नौ बजे अचानक तेज हो गई। नदी की धारा ने देवी माता मंदिर के आसपास की जमीन को काटना शुरू किया और कुछ ही देर में मंदिर का एक हिस्सा ढह गया। देखते ही देखते पूरा मंदिर नदी में समा गया। घटना के बाद मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।

ग्रामीणों के मुताबिक वीर बाबा स्थान क्षेत्र में लंबे समय से आस्था का केंद्र रहा है। यहां धार्मिक आयोजन के साथ मेला भी लगता था। आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज से श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते थे। पहले वीर बाबा और शिव मंदिर के नदी में समाने के बाद अब देवी माता का मंदिर भी कटान की भेंट चढ़ गया।

लगातार कटान से रुरा सुल्तानपुर के ग्रामीणों को अब अपने घर और खेत बचाने की चिंता सताने लगी है। बझेड़ा, मटेहिया समेत आसपास के गांव भी शारदा नदी की बढ़ी धारा से प्रभावित हैं। कई स्थानों पर बाढ़ परियोजना के हिस्से कट चुके हैं।

खेतों में खड़ी धान की फसल जलमग्न होने से किसानों को भी नुकसान की आशंका है। ग्रामीणों ने प्रशासन से कटान रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि संवेदनशील स्थानों पर बोल्डर और बांस आदि के जरिए कटानरोधी कार्य कराया जाए, जिससे गांव और आबादी को नदी की धारा से बचाया जा सके।