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नेपाली प्रधानमंत्री Balen Shah को 26 दिन के कार्यकाल में एक और झटका, गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने दिया इस्तीफा

By Rakesh Mishra Edited By: Dharmendra Pandey
Published: Wed, 22 Apr 2026 07:29 PM (IST)

Nepal Government: गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने महज 26 दिन के कार्यकाल के बाद विवादों के चलते अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

सुदन गुरुंग ने गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया

सुदन गुरुंग ने गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया

HighLights

  1. सुदन गुरुंग के विवादित कारोबारी दीपक भट्टा से संबंधों के आरोप

  2. माइक्रो इंश्योरेंस कंपनियों में संदिग्ध निवेश का मामला

जागरण संवाददाता, लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के बड़े तराई क्षेत्र वाले जिले लखीमपुर के गौरी फंटा से पड़ोसी राष्ट्र नेपाल को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। नेपाल की 26 दिन की बालेन शाह सरकार को दूसरा बड़ा झटका लगा है। मंत्री दीपक कुमार साह को पीएम के बर्खास्त करने के अब गृह मंत्री सूदन गुरंग ने इस्तीफा दे दिया है।

नेपाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। सुदन गुरुंग ने गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह को सौंप दिया है। विवादित व्यवसायी दीपक भट्टा के साथ सुदन की कारोबारी संलिप्तता को लेकर सवार उठने पर उन्होंने इस्तीफा दिया है।

दीपक से साथ विभिन्न शेयर कारोबार में संलिप्तता के आरोप लगने के बाद नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरुंग यह कदम उठाया है। उनके ऊपर लगने के बाद राजनीतिक दबाव बढ़ता गया, जिसके कारण अंततः गुरुंग ने पद को छोड़ दिया। इस्तीफे की जानकारी उन्होंने स्वयं सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने पद से हटने का निर्णय लिया है।

प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने पदभार ग्रहण करने के साथ ही मंत्री परिषद का गठन किया था, जिसमें सुदन गुरुंग को गृह मंत्री बनाया गया था। अब उनके इस्तीफे के बाद नेपाल की सियासत में हलचल तेज हो गई है और नए गृह मंत्री की नियुक्ति को लेकर कवायद भी शुरू हो गई है। सुदन गुरुंग ने सरकार के गठन के महज 26 दिन के कार्यकाल बाद बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

सुदन गुरुंग पर विवादास्पद कारोबारी दीपक भट्टा के साथ व्यापारिक हिस्सेदारी और माइक्रो इंश्योरेंस कंपनियों में संदिग्ध निवेश के आरोप लगे थे।गृह मंत्री बनने के बाद से भ्रष्टाचार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने वाले गुरुंग को अपने ही निजी निवेशों के चलते चौतरफा आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।

गृह मंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप

गृह मंत्री सुदन गुरुंग पर आय से अधिक संपत्ति और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन में शामिल होने के आरोप लगे। विपक्ष और उनके खिलाफ प्रदर्शन करने वालों का दावा है कि गुरूंग कुछ विवादित कारोबार से जुड़े लोगों के संपर्क में रहे हैं। नेपाली मीडिया में भी ऐसे दस्तावेजों का जिक्र हुआ है, जिससे उनके इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर भी लगातार प्रदर्शन किया।

सोशल मीडिया पर दी सफाई

इस्तीफे की घोषणा करते हुए गुरुंग ने फेसबुक पोस्ट पर लिखा, "मैं, सुदन गुरुंग, चैत्र 13, 2082 (26 मार्च, 2026) से गृह मंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन कर रहा हूं। हाल ही में, मैंने अपने शेयरों और संबंधित मामलों के बारे में नागरिकों के उठाए गए प्रश्नों, टिप्पणियों और सार्वजनिक चिंताओं को बहुत गंभीरता से लिया है।"

जनता के विश्वास से बढ़कर कोई शक्ति नहीं

उन्होंने कहा कि मेरे लिए नैतिकता किसी भी पद से अधिक महत्वपूर्ण है, और जनता के विश्वास से बढ़कर कोई शक्ति नहीं है। आज का 'जेनरेशन जेड' आंदोलन, जो सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करता है, यही संदेश देता है, सार्वजनिक जीवन स्वच्छ होना चाहिए और नेतृत्व जवाबदेह होना चाहिए।पद संभालने से पहले जनता का विश्वास सर्वोपरि होना चाहिए। 
गुरुंग ने व्यापक राजनीतिक संदर्भ और देश के अतीत में किए गए बलिदानों का भी जिक्र करते हुए कहा कि जब सवाल उठते हैं तो जवाबदेही आवश्यक है। गुरुंग ने कहा, "जब मेरे 46 भाइयों और बहनों के खून और बलिदान पर बनी सरकार के खिलाफ सवाल उठते हैं, तो एकमात्र जवाब नैतिकता ही है। मैनें सार्वजनिक आलोचना को गंभीरता से लिया और सार्वजनिक जीवन में नैतिक मानकों को बनाए रखने के लिए पद छोड़ने का विकल्प चुना।"

दीपक कुमार को किया था बर्खास्त

इससे पहले नौ अप्रैल को नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने अपनी पार्टी की सिफारिश पर अनुशासनात्मक आरोपों के चलते श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीपक कुमार साह को बर्खास्त कर दिया था।

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प्रधानमंत्री सचिवालय ने कहा कि साह को पार्टी द्वारा आचार संहिता और अनुशासन का उल्लंघन करने के बाद हटाया गया है। आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, साह ने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी पत्नी जूनू श्रेष्ठ को स्वास्थ्य बीमा बोर्ड के सदस्य के रूप में बनाए रखा, जबकि यह पद लंबे समय से निष्क्रिय पड़ा था। आयोग ने बुधवार को पार्टी को अपनी रिपोर्ट सौंपी और कार्रवाई की सिफारिश की।

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