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खीरी में डिजिटल क्रॉप सर्वे की शानदार प्रगति, 1.36 करोड़ का बजट और लाखों गाटों का सर्वेक्षण पूरा

Published: Wed, 25 Feb 2026 12:49 PM (IST)

लखीमपुर खीरी में डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति पर उप कृषि निदेशक कार्यालय ने विस्तृत जानकारी दी है।

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जागरण संवाददाता, लखीमपुर खीरी। डिजिटल क्राप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति को लेकर दैनिक जागरण द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी पर उप कृषि निदेशक कार्यालय ने विस्तृत जवाब दिया है।

जवाब में बजट, सर्वे प्रगति, तकनीकी व्यवस्था और फार्मर आईडी की स्थिति स्पष्ट की गई है।

1.36 करोड़ रुपये का बजट, 65.85 लाख का भुगतान

वित्तीय वर्ष 2025-26 में डिजिटल क्राप सर्वे के लिए 1,36,60,400 रुपये की धनराशि प्राप्त हुई। इसमें से जायद व खरीफ-2025 सर्वे के लिए 65,85,912 रुपये डीबीटी के माध्यम से सर्वेयर और सुपरवाइजरों के खातों में भेजे जा चुके हैं।

विभागीय व प्राइवेट सर्वेयर कर रहे काम

सर्वे कार्य कृषि, राजस्व और पंचायत विभाग के कर्मचारियों के साथ फसलों की जानकारी रखने वाले युवाओं को प्राइवेट सर्वेयर बनाकर कराया जा रहा है। सर्वे के लिए ‘डिजिटल क्राप सर्वे यूपी’ एप का उपयोग किया जा रहा है।

शत प्रतिशत सर्वे पूर्ण

रबी-2026 सत्र में 22 फरवरी तक 9,75,667 गाटों का सर्वे पूरा किया जा चुका है, जो कुल गाटा संख्या का 100 प्रतिशत है। सर्वे की निर्धारित समय सीमा 5 जनवरी से 24 फरवरी 2026 तक तय की गई थी।

सर्वर व तकनीकी दिक्कतों पर विभाग का जवाब

सर्वर की धीमी गति संबंधी किसी समस्या से विभाग ने इनकार किया है। एप में आने वाली तकनीकी खामियों का निस्तारण भारत सरकार स्तर से किया जाता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की समस्या के समाधान के लिए सर्वे आफलाइन मोड में भी किया जा सकता है, जिसे बाद में नेटवर्क उपलब्ध होने पर अपलोड किया जाता है। समस्याओं के समाधान के लिए प्रदेश स्तर पर हेल्प डेस्क की व्यवस्था है।

4.41 लाख किसानों की बनी फार्मर आईडी

फार्मर रजिस्ट्री की वर्तमान स्थिति पर विभाग ने बताया कि जनपद में अब तक 4,41,537 किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है।

विभाग ने स्वीकार किया कि हाल में डिजिटल क्राप सर्वे, एसआईआर व अन्य कार्यों के कारण रजिस्ट्री की गति धीमी रही, लेकिन अब संबंधित विभागों के कर्मचारी मिलकर कार्य में तेजी ला रहे हैं।सर्वे परिणाम विश्लेषण के बाद प्रदेश स्तर से जारी किए जाएंगे।