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पॉलीहाउस से बढ़ेगी किसानों की आय, लखीमपुर में संरक्षित खेती का सफल मॉडल तैयार

Published: Mon, 04 May 2026 01:12 PM (IST)

लखीमपुर खीरी में एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत पॉलीहाउस में संरक्षित खेती का सफल मॉडल तैयार हुआ है। इससे ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

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संवाद सूत्र, लखीमपुर। एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना 2025-26 के तहत जनपद में संरक्षित खेती को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस पहल सामने आई है। पसगवां ब्लाक के ग्राम मानाखेड़ा निवासी मनु यादव और पार्थ सारथी द्वारा स्थापित पालीहाउस स्ट्रक्चर अब किसानों के लिए प्रेरणा बनकर उभरा है। निदेशालय उद्यान, लखनऊ से स्वीकृति मिलने के बाद निर्मित इस स्ट्रक्चर में खीरा फसल का सफल उत्पादन किया गया है।

इस परियोजना का भौतिक सत्यापन उपनिदेशक उद्यान, लखनऊ मंडल, जिला उद्यान अधिकारी खीरी तथा कृषि विज्ञान केंद्र के उद्यान विशेषज्ञों की टीम ने संयुक्त रूप से किया। टीम में वैज्ञानिक आदर्श देश दीपक मिश्रा, वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक अनिल वर्मा, कनिष्ठ सहायक शोभित कुमार श्रीवास्तव सहित एग्रीप्लास्ट संस्था के एग्रोनॉमिस्ट और इंजीनियर भी शामिल रहे। मौके पर संबंधित लाभार्थियों की उपस्थिति में स्ट्रक्चर की गुणवत्ता और उत्पादन की स्थिति का गहन निरीक्षण किया गया।

बाजार में मिलता है बेहतर दाम

विशेषज्ञों ने पाया कि पालीहाउस में उगाई गई खीरा फसल न केवल गुणवत्तापूर्ण है, बल्कि मौसम के विपरीत समय में उत्पादन होने के कारण बाजार में बेहतर दाम भी दिला रही है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि संरक्षित खेती अपनाकर किसान कम क्षेत्र में अधिक आय अर्जित कर सकते हैं।

उद्यान विभाग ने जनपद के सभी कृषकों से अपील की है कि वर्ष 2026-27 में एकीकृत बागवानी विकास योजना के अंतर्गत पालीहाउस और शेडनेट हाउस कार्यक्रम का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। इसके लिए विभागीय पोर्टल पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ पंजीकरण करना अनिवार्य है।

अधिकारियों ने क्या बताया?

अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के तहत किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है, जिससे संरक्षित खेती की लागत काफी कम हो जाती है। पालीहाउस में किसान मौसम से पहले और बाद में भी फसल उत्पादन कर सकते हैं, जिससे बाजार में ऊंचे दाम मिलते हैं और आमदनी में वृद्धि होती है।

अधिक जानकारी के लिए किसान किसी भी कार्य दिवस में जिला उद्यान अधिकारी, लखीमपुर खीरी से संपर्क कर सकते हैं। साथ ही राजकीय पौधशाला देउवापुर पुर परिसर में जाकर योजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है।