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UP में दुग्ध समितियों को मिलेगा कैश क्रेडिट का सहारा, पहली बार 42 समितियों को सुविधा

Published: Tue, 18 Aug 2026 09:03 AM (IST)

लखीमपुर खीरी में दुग्ध सहकारी समितियों को अब कार्यशील पूंजी की कमी नहीं होगी, क्योंकि जिला सहकारी बैंक कैश क्रेडिट ...और पढ़ें

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HighLights

  1. दुग्ध समितियों को कार्यशील पूंजी की कमी से राहत मिलेगी।

  2. जिला सहकारी बैंक द्वारा कैश क्रेडिट लिमिट सुविधा शुरू की गई।

  3. पशुपालकों को दाने, चारे, दवाइयों के लिए तत्काल धन मिलेगा।

संवादसूत्र, जागरण, लखीमपुर। खीरी जिले की दुग्ध सहकारी समितियों को अब कार्यशील पूंजी की कमी से जूझना नहीं पड़ेगा। जिला सहकारी बैंक की ओर से दुग्ध समितियों को कैश क्रेडिट लिमिट की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके तहत समितियां बैंक से जरूरत के मुताबिक धनराशि निकाल सकेंगी और दूध की बिक्री से प्राप्त रकम के माध्यम से उसका भुगतान कर सकेंगी। इससे दुग्ध उत्पादकों को पशुओं के दाने, चारे और दवाइयों आदि के खर्च के लिए तत्काल धन की उपलब्धता होगी।

जिले में वर्तमान में 95 दुग्ध सहकारी समितियां संचालित हैं। इनमें से 42 समितियों को कैश क्रेडिट लिमिट की सुविधा देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। संबंधित समितियों के जिला सहकारी बैंक में खाते भी खोले जा चुके हैं। दो समितियों को लिमिट स्वीकृत भी हो चुकी है।

ईसानगर क्षेत्र की चहलार दुग्ध सहकारी समिति को 10 लाख रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट मिली है। वहीं नकहा क्षेत्र के अटकोहना दुग्ध सहकारी समिति के लिए 6.17 लाख रुपये की लिमिट स्वीकृत की गई है। शेष समितियों की कैश क्रेडिट लिमिट तय करने की प्रक्रिया चल रही है।

पहली बार बैंक से मिला ऐसा वित्तीय सहारा
जिले में दुग्ध समितियों को जिला सहकारी बैंक के माध्यम से पहली बार इस प्रकार की कार्यशील पूंजी सुविधा मिलने जा रही है। इससे समितियों की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने के साथ ही पशुपालकों को समय पर भुगतान और पशुपालन से जुड़े जरूरी खर्च पूरे करने में सहूलियत मिलने की उम्मीद है। बैंक और दुग्ध विभाग की पहल को ग्रामीण दुग्ध अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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प्रबंधक जीएल वर्मा का कहना है कि दुग्ध समितियों को कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कैश क्रेडिट लिमिट की सुविधा शुरू की गई है। वर्तमान में 42 समितियों के लिए प्रक्रिया चल रही है। दो समितियों की लिमिट स्वीकृत हो चुकी है। इससे समितियों को दाना, चारा और दवाइयों सहित आवश्यक खर्चों के लिए धन की कमी नहीं होगी और दूध बिक्री से प्राप्त राशि से बैंक की देनदारी का भुगतान किया जा सकेगा।