लखीमपुर खीरी की तरफ बढ़ रहा 308 पहियों वाले 'महाट्रक', देखने के लिए हाईवे पर उमड़ी भारी भीड़
लखीमपुर खीरी में देश के पहले बायोप्लास्टिक प्लांट के लिए बेल्जियम से आई 'बाहुबली मशीन' चर्चा का विषय बनी हुई है।

HighLights
देश के पहले बायोप्लास्टिक प्लांट के लिए बेल्जियम से आई मशीन।
विशाल मशीन सड़क मार्ग से लखीमपुर खीरी प्लांट पहुंच रही।
मशीन देखने हाईवे पर उमड़ी भीड़, इंटरनेट मीडिया पर वायरल।
संवाद सूत्र, लखीमपुर। देश के पहले बायोप्लास्टिक प्लांट को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां में रहा लखीमपुर खीरी एक बार फिर चर्चा में है, जिसकी वजह प्लांट में लगने वाली बाहुबली मशीन है, जिसे देखने के लिए हाइवे पर लोगों की भीड़ जुट रही है। इंटरनेट मीडिया पर भी मशीन की तस्वीरें और वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहे हैं। बेल्जियम से समुद्री रास्ते ओडिशा पहुंची मशीन अब सड़क मार्ग से लखीमपुर के कुंभी में लगे प्लांट के लिए निकल पड़ी है।
कुंभी चीनी मिल के पास करीब 3080 करोड़ रुपये की लागत से देश का पहला बायोप्लास्टिक प्लांट करीब 135 एकड़ जमीन पर स्थापित हो रहा है। इसकी आधारशिला फरवरी 2025 में सीएम योगी ने रखी थी।
प्लांट की क्षमता 80 हजार टन प्रतिवर्ष बताई जाती है। इस प्लांट के शुरू होने से लखीमपुर खीरी (कुंभी) को देश में एक नई औद्योगिक पहचान मिलेगी। इससे पहले लखीमपुर स्थित प्लांट में लगने के लिए आ रही बाहुबली मशीन ने लोगों का कौतूहल और बढ़ा दिया है।
हाइवे पर जहां से गुजरती है मशीन, लग जाती है भीड़
मशीन का आकार इतना विशाल है कि वह जिस हाइवे से इसका काफिला गुजरता है, वहां पर इसे देखने के लिए लोगों का मजमा लग जाता है। कई स्थानों पर लोगों के लिए यह किसी अजूबे से कम नहीं है। विशाल ट्रेलर, दर्जनों टायर और उसके ऊपर रखी मशीन को देखकर लोग वीडियो बनाकर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कर रहे हैं।
कई चुनौतियों का करना पड़ रहा सामना
लखीमपुर पहुंचने में बाहुबली मशीन को तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी चुनौती रेलवे ओवरब्रिज, टोल प्लाजा से लेकर हाइवे पर लगे पीडब्लूडी के बोर्ड और संकरे मार्ग हैं। जहां से मशीन के निकलने की गुंजाइश नहीं है, वहां पर वैकल्पिक रास्ता तैयार कर बोर्ड आदि को खोलकर पुन: लगाया जा रहा है। मशीन को सुरक्षित तरीके से प्लांट तक पहुंचाने के लिए मार्ग की चौड़ाई, मोड़ और ऊंचाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
एक माह का अभी लग सकता है आने में समय
विभागीय लोग अगले माह प्लांट शुरू होने की संभावना जता रहे हैं। जबकि परिवहन की जटिलता के कारण मशीन जो इस समय बिहार में है को कुंभी स्थित प्लांट तक पहुंचने में दो माह से अधिक समय लगने की संभावना है। मशीन का काफिला धीमी गति से आगे बढ़ रहा है।
कुंभी चीनी मिल के मुख्य महाप्रबंधक सुनील कुमार यादव ने बताया कि भारी वेसल को विशेष हाइड्रोलिक ट्रक से सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्लांट तक पहुंचाया जा रहा है।
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