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लखीमपुर में महिलाएं दीवारों पर उकेर रहीं सुहाग के सपने, रंगों से संवार रहीं संस्कृति की विरासत

Published: Tue, 27 Oct 2026 08:07 PM (IST)

ग्रामीण लखीमपुर में करवा चौथ पर महिलाएं घरों की दीवारों पर पारंपरिक चित्रकारी कर रही हैं, जो आधुनिकता के बावजूद ...और पढ़ें

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HighLights

  1. करवा चौथ पर ग्रामीण महिलाएं दीवारों पर पारंपरिक चित्रकारी करती हैं।

  2. यह कला सुहाग, प्रेम और परिवार की समृद्धि की कामना दर्शाती है।

  3. नई पीढ़ी भी इस सांस्कृतिक विरासत को उत्साह से आगे बढ़ा रही है।

संवादसूत्र, बिझौली (लखीमपुर)। वक्त बदला, घरों की साज-सज्जा के तरीके बदले और आधुनिकता ने जीवनशैली में अपनी जगह बना ली, लेकिन ग्रामीण महिलाओं के मन में रची-बसी लोक परंपराओं के रंग आज भी फीके नहीं पड़े हैं। करवा चौथ पर घर की दीवारों पर उकेरी जाने वाली पारंपरिक चित्रकारी इसका जीवंत उदाहरण है। इन दीवारों पर केवल आकृतियां नहीं बनतीं, बल्कि सुहाग की मंगलकामना, दांपत्य प्रेम और परिवार की सुख-समृद्धि के सपने भी आकार लेते हैं।

करवा चौथ का पर्व आते ही ग्रामीण अंचलों में इसकी तैयारियां शुरू हो जाती हैं। महिलाएं घर की दीवारों को साफ कर उन पर श्रद्धा और लगन से पारंपरिक चित्र उकेरती हैं। भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, सूर्य, चंद्रमा और करवा माता की आकृतियों के साथ फूल-पत्तियों और अन्य मांगलिक प्रतीकों को भी स्थान दिया जाता है। इन चित्रों के सामने पूजन-अर्चन और व्रत कथा के माध्यम से महिलाएं पति की दीर्घायु, दांपत्य जीवन में प्रेम और परिवार में सुख-शांति की कामना करती हैं।

रंगों में घुली आस्था, आकृतियों में संस्कार

दीवारों पर होने वाली यह चित्रकारी महज सजावट नहीं, बल्कि लोकविश्वास और सांस्कृतिक विरासत की अभिव्यक्ति है। हर आकृति के साथ जुड़ी मान्यता महिलाओं के मन में पर्व के प्रति श्रद्धा को और गहरा करती है। चित्र बनाते समय उनकी रचनात्मकता के साथ पीढ़ियों से चले आ रहे संस्कार भी उभरकर सामने आते हैं।

मां-दादी से सीख रही नई पीढ़ी

इस परंपरा को जीवित रखने में बुजुर्ग महिलाओं की भूमिका अहम है। मां और दादी से सीखी गई कला बेटियों और बहुओं तक पहुंच रही है। नई पीढ़ी की युवतियां भी दीवारों पर पारंपरिक चित्र बनाकर इस विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। शिवानी कश्यप चिन्तापुरवा की ऐसी ही युवतियों में शामिल हैं, जिनके हाथों में उभरती आकृतियां परंपरा से जुड़ाव की कहानी कहती हैं।

बदलते समय के बीच यह लोककला याद दिलाती है कि संस्कृति केवल किताबों और आयोजनों में नहीं, बल्कि घर-आंगन में निभाई जाने वाली छोटी-छोटी परंपराओं में भी जीवित रहती है। करवा चौथ पर दीवारों पर सजते ये रंग सुहाग की मंगलकामना के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा भी देते हैं।

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