लखीमपुर जिला अस्पताल में मरीज से मारपीट, स्टाफ नर्स पर कार्रवाई, दो डॉक्टर निलंबित
लखीमपुर खीरी के जिला अस्पताल में एक मरीज के साथ स्टाफ नर्स द्वारा मारपीट का आरोप लगा है, जिससे अस्पताल में हंगामा हो गया।

HighLights
जिला अस्पताल में मरीज से स्टाफ नर्स ने की मारपीट।
मारपीट के बाद मरीज के मुंह से खून निकला।
दो डॉक्टर निलंबित, आरोपी नर्स की बर्खास्तगी की कार्रवाई।
जागरण संवाददाता, लखीमपुर। जिला अस्पताल में मरीजों के साथ अभद्रता और विवाद का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार देर रात बेहोशी की हालत में लाए गए मरीज के साथ संविदा स्टाफ नर्स द्वारा मारपीट किए जाने का आरोप लगा तो अस्पताल में हंगामा खड़ा हो गया।
मरीज के स्वजन का आरोप है कि नर्स ने इतने थप्पड़ मारे कि उसके मुंह से खून तक निकल आया। मामला बढ़ने पर सदर विधायक योगेश वर्मा मौके पर पहुंच गए। मेडिकल कालेज की प्रधानाचार्य डॉ. वाणी गुप्ता और सीएमएस डॉ. राजकुमार कोहली भी पहुंचे।
इधर शनिवार देरशाम प्रधानाचार्य डॉ. वाणी गुप्ता ने इस मामले में मरीज के साथ अभद्रता में डॉ. योगेश व डाॅ. कासिम को एक-एक हफ्ते के लिए सस्पेंड किया है, उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसके अलावा संविदा के स्टाफ नर्स जयपाल को बर्खास्त करने के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा गया है। उनके विरुद्ध प्राथमिकी की दर्ज कराई गई है।
यह है पूरा मामला
मेला मैदान स्थित एक निजी अस्पताल में काम करने वाला राहुल विश्वकर्मा शुक्रवार दोपहर अचानक बेहोश हो गया था। उसके हाथ-पैर ठंडे पड़ गए और हालत बिगड़ने पर स्वजन उसे घर ले गए। रात करीब 9:30 बजे एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया।
स्वजन के मुताबिक चिकित्सकों ने उपचार शुरू करते हुए इंजेक्शन और ग्लूकोज लगाया और बाद में मरीज को मेडिकल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। आरोप है कि इसी दौरान स्टाफ नर्स जयपाल मरीज को देखने पहुंचा। बेहोशी की हालत में राहुल हाथ-पैर चला रहा था।
स्वजन का कहना है कि इसी बात पर नर्स ने उसे थप्पड़ मारना शुरू कर दिया। मारपीट में मरीज के मुंह से खून निकल आया। घटना के बाद स्वजन ने चिकित्सकों से शिकायत की, जिसके बाद अस्पताल में हंगामा शुरू हो गया।
सूचना पर पहुंचे सदर विधायक ने मौके पर मौजूद चिकित्सकों से नाराजगी जताई और पूरे मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रधानाचार्य और सीएमएस ने भी प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया।
जिला अस्पताल में यह पहला विवाद नहीं है। यहां आए दिन कभी चिकित्सकों की गैरमौजूदगी, कभी दवाओं की उपलब्धता और कभी सुविधाओं को लेकर मरीजों और उनके स्वजन का गुस्सा सामने आता रहा है। सुविधा शुल्क मांगने के आरोपों को लेकर भी पूर्व में विवाद और हंगामे होते रहे हैं।
ऐसे में सवाल यह है कि इलाज और राहत की उम्मीद लेकर जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को आखिर कब बेहतर व्यवहार और सुरक्षित उपचार का भरोसा मिलेगा। ताजा घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और मरीजों के प्रति जिम्मेदारी पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
