लखीमपुर: प्रसव के दौरान नवजात शिशु व उसके दूसरे दिन इलाज के लिए ले जाते समय रास्ते में प्रसूता की भी मौत हो गई। वापस आकर परिवारजनों ने बुधवार शाम अस्पताल के बाहर शव रखकर कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने परिवारजनों के बयान दर्ज कर लिए हैं।

सिगाही थाने के मनमदपुर गांव निवासी छोटेलाल की बेटी आरती (25) की शादी चार साल पहले इसी थाना क्षेत्र के खैरीगढ़ गांव के रामू यादव के साथ हुई थी। आरती को पहला बच्चा होने वाला था। उसको रविवार को निघासन कस्बे के एक निजी हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। वहां बच्चे की प्रसव के दौरान मौत हो गई। इसके बाद आरती का इलाज चलता रहा। परिवारजनों का कहना था कि हालत खराब होने के बावजूद अस्पताल वाले उसको भर्ती रखे रहे। बुधवार को अस्पताल से उसे लखीमपुर भेजा गया। रास्ते में शारदा नगर के पास आरती की मौत हो गई। इससे गुस्साए परिवारजनों ने आरती के शव को शाम करीब साढ़े सात बजे वापस अस्पताल ले आए और वहां उसे रखकर हंगामा करने लगे। कुछ लोगों ने वहां डाक्टर का चैंबर वगैरह तोड़ने की कोशिश की लेकिन, वहां मौजूद महिला के परिवारजनों ने उनको ऐसा करने से रोक दिया। महिला के रिश्तेदारों व परिवार के लोगों समेत करीब पंद्रह लोग अस्पताल के अंदर तक बैठे रहे। इससे डरकर अस्पताल का सारा स्टाफ वहां से भाग गया। अस्पताल पर हंगामे की सूचना पाकर पहुंचे एसआई एके सिंह ने बताया कि अस्पताल में केवल महिला के परिवारजन के ही लोग हैं। उन्होंने कोई तहरीर अभी नहीं दी है। अस्पताल का कोई आदमी वहां मौजूद नहीं है जिससे मामले की पूरी जानकारी हो सके।

छापामारी अभियान में अस्पताल सीज, दो को नोटिस स्वास्थ्य विभाग की टीम ने निजी अस्पतालों पर छापामार कार्रवाई करते हुए एक अस्पताल सीज किया, जबकि दो अस्पताल संचालक को नोटिस जारी की।

कुंभी के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डा. गणेश कुमार, डा. एसबी गोस्वामी ने टीम के साथ खुटार रोड पर एक हास्पिटल में छापा मारा, जहां कोई डाक्टर नहीं मिला। कर्मचारी कोई जानकारी नहीं दे सके। टीम ने अस्पताल में भर्ती मरीजों को देखने व मानकों के पूरा न होने के चलते अस्पताल को सीज कर दिया। इसके बाद टीम ने मोहम्मदी रोड सरायन नदी के निकट एक अस्पताल पर छापा मारा। वहां भी कोई डाक्टर नहीं मिला तथा न ही कोई प्रशिक्षित स्टाफ मिला हालांकि अस्पताल कर्मियों ने टीम को भरोसा दिलाया कि बुधवार तक अपने सभी कागजात प्रस्तुत कर देंगे। इस आश्वासन पर टीम ने उन्हें नोटिस देकर छोड़ दिया। उसके बाद टीम कंजा स्थित एक निजी अस्पताल पहुंची। यहां भी डाक्टर प्रैक्टिस करते मिले, पर कोई डिग्री नहीं दिखा सके तथा बुधवार तक डिग्री और रजिस्ट्रेशन के कागजात प्रस्तुत करने की बात कही।

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जिम्मेदार की सुनिए

कुंभी के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डा. गणेश कुमार ने बताया कि शहर के तमाम अस्पतालों की शिकायत मिल रही थी। जिसे लेकर जांच अभियान चलाया गया। अस्पताल का रजिस्ट्रेशन, डाक्टरों की डिग्री के साथ ही स्टाफ प्रशिक्षित है, कि नहीं इसकी भी जांच की जा रही है। अवैध रूप से संचालित निजी अस्पतालों को सीज किया जाएगा।

Edited By: Jagran