लखीमपुर: रात में निगरानी को तैनात वनकर्मी सोते रहे और बाघिन ने पड्डे को निवाला बना लिया। हाथियों के चिघाड़ने पर वनकर्मी बाघिन के आने के बारे में जान पाए। बाघिन बार-बार उसी मंदिर के पास आ रही है, जहां से पुजारी को खींच कर जंगल में ले गई थी।

एक सप्ताह से बाघिन को पकड़ने के लिए जो प्रयास किया जा रहा, वह पूरी तरह असफल साबित हो रहा है।

दुधवा एफडी संजय पाठक, डीडी बफरजोन सुंदरेशा पूरी टीम के साथ जहां खैरटिया इलाके में बाघिन को पकड़ने के लिए लगातार नजर गड़ाए हुए हैं। बाघिन तो वन कर्मियों के हाथ नहीं लगी, लेकिन इलाके में ग्रामीण खौफजदा होते जा रहे हैं। अधिकारी भले ही कुछ भी कह रहे हो मगर इतना तो साफ है कि बाघिन अभी तक उनके कब्जे में नहीं आ सकी है, जिससे लगातार और घटनाएं बढ़ने की संभावना बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि डर के कारण रातभर जागकर अपनी व मवेशियों की भी देखभाल करनी पड़ रही है। इधर, वन क्षेत्राधिकारी विमलेश कुमार ने बताया कि पड्डे को पिजड़े में बांधने के लिए लाया गया था। हाथी की चिघाड़ से वनकर्मी जागे तो देखा कि बाघिन पड्डे को अपना शिकार बनाने के बाद भाग रही थी। इसे देखते हुए तीन और पिजड़े और लगा दिए जाएंगे। पूरी ताकत से वन विभाग बाघिन को पकड़ने का प्रयास कर रहा है।

पीलीभीत से बुलाई गई एक और हथिनी

पीलीभीत से वन विभाग ने एक हथिनी 'डेना' को मंगाया है। वन दरोगा हरीलाल ने बताया कि विशेषज्ञों की लगी टीम की सलाह पर पीलीभीत से एक्सपर्ट हथिनी को बुलाया गया है। अब कुल चार हथिनी खैरटिया इलाके में पहुंच चुकी हैं।

Edited By: Jagran