लखीमपुर: पिछले वर्ष पौधारोपण अभियान के दौरान कई सरकारी विभागों ने पौधों की प्रजातियां को लेकर दिक्कतें खड़ी कर दी थीं लेकिन, इस बार सरकारी विभागों की डिमांड नहीं चलेगी। चयनित स्थल पर उन्हें वही पौधारोपण करना है जिन्हें वन विभाग की नर्सरी में उगाया जा रहा है। इस बार वन विभाग ने तराई की धरती के अनुकूल उगाए जाने वाले पौधों की प्रजातियां तैयार की है।

वर्षा काल शुरू होने पर जिले में 66 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया है। पौधारोपण के लिए इस बार फलदार, छायादार, शोभाकार और कास्ट आधारित प्रजाति के पौधे वन विभाग के साउथ डिवीजन की 19 और नार्थ की 32 नर्सरी में उगाए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में फलदार पौधों में जामुन, आम, आंवला, अमरूद, सहजन, इमली को शामिल किया गया है। वहीं छायादार पौधों में पीपल, पाकड़ और बरगद का रोपण होगा। बेशकीमती प्रजातियों में शीशम, यूकेलिप्टस, सागौन, सीरस के पौधे लगाए जाएंगे। शहरी क्षेत्र में गोल्ड मोहर, अमलताश, अशोक, नीम, शमी आदि प्रजातियों का रोपण होना है। पिछले वर्ष पौधारोपण अभियान के दौरान यह देखने में आया था कि कई विभागों ने ऐसी प्रजातियों की डिमांड वन विभाग के सामने रखी थी जो पौधे नर्सरियों में नहीं थे।

जिम्मेदार की सुनिए

एसडीओ रविशंकर शुक्ला का कहना है कि वन विभाग की नर्सरियों में हर प्रजाति के पौधे उगाए गए हैं लेकिन, सबसे ज्यादा जोर फलदार, शोभाकार, छायाकार और कास्ट आधारित प्रजाति पर है। विभागों से डिमांड आने पर उन्हें पौधे उपलब्ध कराया जाएगा।

Posted By: Jagran

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