लखीमपुर : शहर में यातायात व्यवस्था को लेकर स्थिति गंभीर होती जा रही है। न तो बाइक सवारों के द्वारा मोबाइल पर बात करने का सिलसिला खत्म हुआ न ही सीट बेल्ट की जरूरत चौपहिया वाहनों में लोगों को महसूस हो रही है। लापरवाहों के आगे सहायक संभागीय परिवहन विभाग के अभियान भी दम तोड़ते दिखाई दे रहे हैं। विभाग दावा करता है कि उसने अभियान करके चालान किए हैं। कार्रवाई की है लेकिन यह सब कहां हुआ, इसका क्या असर हुआ इनके जवाब ढूंढ पाना मुश्किल है। जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

चौराहों पर बिना हेलमेट एक बाइक पर बैठे तीन तीन लोग फर्राटा भरते दिखाई दे रहे है। सौजन्या चौराहे से लेकर गुरु गोविद सिंह चौराहे तक यहां तक कि हाईवे पर भी मोबाइल पर बात करने का सिलसिला नहीं रुक रहा तो फिर क्या हो इन अभियानों का जो विभागों के द्वारा चलाए जा रहे हैं। मंगलवार की दोपहर सौजन्या चौराहे पर एक भी सिपाही नहीं था। इस दौरान यहां पर ओवरलोडेड मैजिक और बाइक पर बिना हेलमेट फर्राटा भरते मोबाइल पर बात करते हैं। बाइक सवारों को आसानी से देखा गया। यही हाल गुरु गोविद सिंह चौक गांधी विद्यालय के पास भी अक्सर रहता है यहां तो दाएं ओर से गाड़ी निकालना परंपरा बन चुकी है लेकिन इस पर भी कोई टोके तो कैसे क्योंकि यहां तो कभी पुलिस या ट्रैफिक का कोई सिपाही दिखाई ही नहीं पड़ता। इतना ही नहीं नगर पालिका रोड पर हीरालाल धर्मशाला के पास भी ट्रैफिक नियमों की धज्जियां पूरी सड़क पर उड़ती है। जब जगह-जगह टेंपो और ई-रिक्शा सड़क रोककर सवारी भरते हैं। सोंचने की बात है जब यह सारे ²श्य आम आदमी को दिख सकते हैं, तो प्रशासन को क्यों नहीं लेकिन कागजी अभियान और बयान बाजी के चलते व्यवस्था पर कोई अंकुश नहीं लग रहा।

Posted By: Jagran

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