लखीमपुर: शहर से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित लखीमपुर देहात का गांव घोसियाना आज दूध उत्पादन के लिए मशहूर हो गया है। शहर के नजदीक घोसियाना ही ऐसा गांव है, जहां 350 पशुओं से पांच क्विंटल दूध का उत्पादन रोजाना होता है और पूरा दूध शहरी आबादी के लिए सप्लाई किया जाता है। दूध उद्योग के साथ ही प्रदेश चैंपियन मुन्ना टाइगर और अजीज सरीखे पहलवानों ने गांव का नाम रोशन किया। मुन्ना के मित्रों में शुमार कुश्ती के विश्व चैंपियन रहे दारा ¨सह और मास्टर जंदगी राम ने घोसियाना में रूक कर युवाओं को कुश्ती के लिए प्रेरित किया। घोसियाना गांव से ही कुम्हारी कला को गति मिली और लोग मिट्टी की मूर्तियां बनाने लगे। लखीमपुर से महेवागंज को जोड़ने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हस्तक्षेप से त्वरित योजना में बनाई गई साढ़े तीन किलोमीटर की सड़क शहरी यातायात के लिए वरदान बनी हुई है। इन पर नाज है :

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1990 के दशक में पहलवान मुन्ना टाइगर लखीमपुर के साथ ही प्रदेश के कई जिलों में चर्चित हुए। 1988 में मुन्ना टाइगर कुश्ती में जिला चैंपियन हुए और 1990 में प्रदेश चैंपियन होने का गौरव हासिल किया। अन्य जिलों में मुन्ना कुश्ती के लिए जाते थे तो उत्साहवर्धन करने गांव से लोग साथ जाते थे।

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घोसियाना के ही पहलवान अजीज भी 1990 के दौरान कुश्ती में काफी मशहूर हुए। जिला चैंपियन होने के साथ ही वह पूरे लखनऊ मंडल में अपना लोहा मनवाते रहे। अजीज मुन्ना टाइगर के साथ ही अखाड़े में कुश्ती लड़ते थे, गांव वालों को मुन्ना के साथ ही अजीज पर भी नाज था। फोटो 11एलएके 07

घोसियाना गांव के ही निसार महलूद ने 1975 में इंजीनिय¨रग की पढ़ाई पूरी की लेकिन, उन्होंने सरकारी नौकरी करने के बजाए गांव में रहकर ही लोगों को शिक्षा के लिए प्रेरित करना शुरू किया। घरवालों की सहमति से उन्होंने सेठघाठ में मंदिर के लिए छह बीघा जमीन दान कर दी थी। फोटो 11एलएके 08

घोसियाना के अंसार महलूद सपा के संस्थापक सदस्य बनने के साथ ही युवजन सभा के तीन बार नगर अध्यक्ष, दो बार विधानसभा अध्यक्ष फिर जिला महासचिव बने। इसके बाद वह मुलायम यूथ ब्रिगेड के जिलाध्यक्ष तथा लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और दो बार प्रधान चुने गए। फोटो 11एलएके 09

पूरे गांव में साहिल ने सबसे पहले भारतीय सेना में शामिल होकर युवाओं के प्रेरणास्त्रोत बने। साहिल आज लद्दाख में सेना क चौकी पर तैनात होकर देश की सेवा कर रहे हैं। इसके बाद युवाओं का रूझान सुरक्षा बल की नौकरी की ओर बढ़ा। देश-प्रदेश में गांव का नाम रोशन कर रहे इन युवाओं पर पूरे गांव को नाज है। -यह है खूबी :

गांव में 60 प्रतिशत किसान हैं जो कृषि के साथ दूध का उत्पादन कर व्यापार कर रहे हैं। दो प्रतिशत लोग सरकारी नौकरी में हैं और शेष मेहनत-मजदूरी करते हैं। दूध और कृषि ही गांव की लाइफ लाइन है।

-आधारभूत ढांचा : सरकारी आंकड़ों में यहां की आबादी छह हजार ही दर्ज है लेकिन, वास्तव में पूरी ग्राम सभा की आबादी करीब 25 हजार है। 13 हजार मतदाता हैं। गांव में दो प्राथमिक व एक उच्च प्राथमिक स्कूल है। पोस्ट आफिस, थाना व प्राथमिक अस्पताल की सुविधा के लिए लोगों को तीन किमी दूर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। 12 कुंआ हैं, जिनका पानी अब लोग नहीं पीते हैं। तीन आंगनबाड़ी केंद्र, 50 हैंडपंप लगे हैं। ग्रामीण पाइप पेयजल योजना संचालित नहीं है। आठ तालाबों में एक पर अतिक्रमण है। ग्रामसभा में घोसियाना, सुआगाढ़ा, प्यारेपुर देहात, बेगमबाग, पदमावती कॉलोनी, गांधीनगर, सुभाषनगर, प्रमिलानगर, शांतिनगर, सरनापुरम के नाम से मजरे दर्ज हैं।

-यह हो तो बने बात :

गांधीनगर, सुभाषनगर की आबादी ईंट-भठ्ठे के गड्ढे में बसी है। यहां खूब जलभराव होता है। यहां दो किमी. नाला की जरूरत है। नगर पालिका का पानी ग्राम सभा की सीमा पर छोड़ा जाता है, अगर नाला बंद हो जाए तो लोगों की दिक्कतें कम हो सकती हैं।

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-²ष्टिकोण : वर्तमान प्रधान अफशाना महलूद का कहना है कि गांव में स्टेडियम, अस्पताल, गांधीनगर में वाटर पार्क पंचायत घर और बारात घर की जरूरत महसूस की जा रही है। प्रशासन को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा जाएगा। ताकि लोगों को दिक्कत न हो। फोटो 11एलएके 04

पूर्व प्रधान अलीम का कहना है कि घोसियाना से होकर प्रतिदिन 10 से 12 हजार लोग 25 से 30 गांवों में अपने कार्यों के लिए जाते हैं लेकिन, गांव के अंदर सड़क खराब होने की वजह से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सड़क बन जाए तो लोगों को आराम मिलेगा।

उपलब्धि : घोसियाना में शहर का सबसे पुराना श्मसान घाट है। 65 प्रतिशत ¨हदू व 34 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाली ग्राम सभा में सभी लोग भाईचारे के साथ रहते हैं। गांव के लोग इसे एक उपलब्धि भी मानते हैं। गांव में 60 शौचालय बन गए हैं और 150 शौचालय प्रस्तावित हैं।

Posted By: Jagran