खीरीटाउन (लखीमपुर) : पांचवी मुहर्रम का जुलूस बड़ी अकीदत व एहतराम के साथ निकाला गया। जुलूस कस्बे की गलियों से गुजरता हुआ देर रात सुन्नी इमामबाड़ा में समाप्त हुआ। पांचवीं मुहर्रम का जुलूस ढोल, ताशों और नक्कारों के साथ मातमी धुन में निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की याद में अकीदतमंदों ने अपने हाथों में अलम लेकर या हुसैन के नारे लगाए। जगह-जगह अकीदतमंदों ने लंगर बांटा। सुबह बाजार से उठने वाला जुलूस कस्बे के मुहल्ला अवधी टोला, जोशी टोला, हनिया टोला, बुखारी टोला, डीहपुर, कटरा, सैय्यदवाड़ा, पट्टी रामदास होता हुआ देर रात सुन्नी इमामबाड़ा में समाप्त हुआ। जुलूस में सुरक्षा के मद्देजर खीरी थाना इंस्पेक्टर विपिन कुमार ¨सह मय ़फोर्स के मौजूद रहे

अमीरनगर संवादसूत्र के अनुसार मेले में तीन ताजिया विशालकाय हैं। जिनकी ऊंचाई 100 फिट से अधिक बताई जा रही है, जबकि अन्य ताजियों की ऊंचाईयां 10 फीट से लेकर 50 फीट तक है। 17 सितंबर से ताजिया जुलूस निकाले जाएंगे और विशालकाय ताजिया 23 सितंबर को कर्बला के मैदान में दफन होगा। मोहम्मदपुर अमीरनगर कर्बला शरीफ में ताजिया मेला शुरू हो गया है जो 23 सितंबर तक चलता रहेगा। इस मेले में दूर दराज से बड़ी तादात में लोग आते हैं। ताजियादार जाहिद खान, बाबा रफाकत खान ने बताया कि छठवीं का जुलूस 17 सितंबर को गांव मोहम्मदपुर में, 18 सितंबर को अलम का जुलूस, 19 सितंबर को आठवीं का जुलूस, नौंवी का जुलूस 20 सितंबर को अमीरनगर से तथा 21 तारीख को गांवों में ताजियों का पूरी अकीदत के साथ जलूस निकलेंगे। मेला ताजियादारों ने बताया कि मोहम्मदपुर मेला मैदान में प्रात: 10:00 बजे से लेकर 11:00 बजे तक लगभग डेढ़ दर्जन गांव से ताजियेदार अपने कंधों पर ताजियों को लेकर मातमी जुलूस करते हुए 22 सितंबर को पहुंचेंगे। मेले के मुख्य आकर्षण ताजिया मिलाप बैंड बाजा प्रतियोगिता मातम कार्यक्रम होगा। गोलागोकर्णनाथ संवादसूत्र के अनुसार अढोला गांव में शिया समुदाय के अंजुमनों ने पांचवी मुहर्रम का जुलूस बड़ी अकीदत व एहतराम के साथ निकाला। जुलूस में आढोला गांव की अंजुमन के अलावा मैगलगंज क्षेत्र के कूटा गांव की अंजुमन हुसैनी, कस्बा खीरी की अंजुमन गुलामाने हुसैन व अंजुमन हुसैनिया के सैकड़ों लोगों ने जुलूस निकाला और हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातम किया। जुलूस अढोला की अबु तालिब मस्जिद से शुरू होकर पूरे गांव में निकाला गया। जगह-जगह लोगों ने लंगर बांटा। अंजुमन के लोगों ने मातम किया और मरशिये पढ़े।

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