लखीमपुर: हजरत इमाम हुसैन की शहादत के महीने मुहर्रम की शुरुआत होते ही शहर में ढोल-ताशों की दुकानें सज गई हैं। दुकानों पर पुराने ढोल भी बनने लगे हैं। इसके अलावा मजलिसों का दौर शुरू हो गया है। मस्जिदों में पेश इमामों ने अपनी तकरीर में उनके जिक्र मुबारक शुरू कर दिए हैं।

मीनार मस्जिद के पेश इमाम मौलाना अशफाक कादरी ने बताया कि हजरत इमाम हुसैन ने अपने नाना पै़गम्बरे आ•ाम (सल्ल.) दीन इस्लाम की हिफा•ात के लिए अपनी कुर्बानी दे दी लेकिन बातिल यजीद के हाथों में हाथ नहीं दिया। इस्लामी कैलेंडर का सबसे पहला महीना मोहर्रम है।जिसकी 10 तारीख को हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी हुई थी। तब से उसी याद में हर मोमिन 10 मुहर्रम को मजलिस करके उनकी याद करता है। उधर ढोल-ताशों की दुकानों पर भी तेजी दिखाई पड़ने लगी है। नगर पालिका रोड पर मीनार मस्जिद के नीचे करीम वारसी बताते हैं कि सुबह से शाम तक करीब 500 ढोल मढ़े हुए तथा नए मिलाकर सभी खरीदे जा रहे हैं। दूर दराज से आकर खरीदार मोल भाव करने लगे हैं।

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