लखीमपुर : बाढ़ के समय और और बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में तमाम तरह की बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं विषैले जीव-जंतु भी लोगों के लिए खतरा बन जाते हैं। ऐसे में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की बेहद जरूरत हाती है, लेकिन ये सुविधाएं पीड़ितों को कम ही मिल पाती हैं। इन दिनों भी फूलबेहड़ व धौरहरा क्षेत्र में ऐसे ही हालात हैं।

फूलबेहड़ : बाढ़ का पानी उतरने के बाद इलाके में बीमारियों से लोग जूझ रहे हैं। क्षेत्र में बुखार, जुकाम, खांसी, पैर सड़ने जैसी बीमारियों से लोग परेशान हैं। उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल रहा है। हालांकि स्वास्थ विभाग की टीम ने गावों में जाकर लोगों का इलाज शुरू किया है। फूलबेहड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की तीन सदस्यीय टीम ने मंगलीपुरवा व जगन्नाथपुरवा में जाकर बीमार लोगों को देखा और दवाएं दीं। उधर बाढ़ पीड़ित ग्रामीणों से बात की तो खलील खां निवासी मंगलीपुरवा ने बताया कि गांव में अभी निचले हिस्सों में पानी भरा है, जिससे मच्छरों की भरमार है। गांव में तमाम लोग बुखार, जुखाम से परेशान हैं। मंगलीपुरवा के ही रफीक का कहना है कि गांव में अभी तक दवा देने कोई नहीं आया था। आज टीम गांव पहुंची है, तभी बुखार की दवा मिली है और स्लाइड बनायी गयी है। बेड़हा के दीनानाथ सिर दर्द, बुखार से एक सप्ताह से परेशान हैं, दवा ले रहे हैं, मगर फायदा नहीं हो रहा है। उनका कहना है गांव में कोई सरकारी डॉक्टर नहीं पहुंचा है। जदीदपुरवा के जमुना प्रसाद के पेट में दर्द है और बुखार भी है। इन्होंने बताया कि जब से बाढ़ आई है तब से परेशान हैं, मगर कोई भी स्वास्थ्य विभाग की टीम अभी तक गांव नहीं पहुंची है। पीएचसी फूलबेहड़ के रामबचन यादव, सुरेश वर्मा, मुनीश की टीम ने मंगलीपुरवा व जगन्नाथ पुरवा गांव में शिविर लगाकर दवाएं वितरित कीं व स्लाइड भी बनाई।

भीरा : क्षेत्र के कटान पीड़ित गांव छंगा टांडा, जंगल नंबर 7, प्रताप टांडा में स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंची है। इन गांवों में संक्रामक बीमारी फैल रही हैं। दौलतापुर, मटैहिया, मझौरा, जंगल नंबर सात, बरुआ, किशनपुर आदि गांवों में बाढ़ का पानी तो कम हुआ है, लेकिन ग्रामीणों की दुश्वारियां बढ़ गई। खाने-पीने की दिक्कत है तो स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ने लगा है। इन गांवों में खांसी, चर्म रोग, बुखार व अन्य रोगों का ़खतरा बढ़ गया है। बढ़ती गर्मी और जलभराव की वजह से मछरों की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा है। इस मामले में सीएचसी अधीक्षक अमितेज द्विवेदी ने बताया की उनको इन रोगों के फैलने की जानकारी नहीं है, लेकिन जल्द ही संबंधित गांवों में टीम भेज कर दवाओं का छिड़काव कराया जाएगा।

हर¨सहपुर में 47 छात्र-छात्रा बने बुखार के शिकार

संवादसूत्र, धौरहरा (लखीमपुर) : बाढ़, बरसात और जलभराव के बाद गांवों में बीमारियां पैर पसार चुकी हैं। धौरहरा ब्लॉक के ग्राम हर¨सहपुर में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल में ही 47 बच्चों के वायरल बुखार से पीड़ित होने की बात पता चली है। इसके अलावा भी गांव में लोग बीमार है। गांव हर¨सहपुर तक जाने की सीधी सड़क बाढ़ से अवरुद्ध है। तहसील मुख्यालय तक ही आने में यहां के लोग 40 किलोमीटर लंबा सफर तय करते हैं। यह गांव बाढ़ के पानी से घिर जाता है। साथ ही गांव में बरसात के पानी का जमाव भी बहुत है। यही वजह है कि बरसात थमने के बाद जब धूप निकलनी शुरू हुई, तो गांव पर बीमारियों ने हल्ला बोल दिया है। हर¨सहपुर के प्राथमिक स्कूल में 32 छात्र-छात्राएं बुखार से जूझ रहे हैं। यहां के उच्च प्राथमिक स्कूल के 15 छात्र-छात्राएं बुखार से पीड़ित हैं।

स्कूल के यह छात्र छात्रा हैं बीमार प्राथमिक स्कूल

फुरकान, इरफान, पूजा देवी, होलीराम, अर¨वद कुमार, धर्मेंद्र कुमार, कपिल कुमार, ओम वर्मा, शांती देवी, रंजना, पारुल, प्रिया, रीता, राकेश, जन्मेजय, सुमन देवी, मोहिनी, विकास, सुमिला, सुमित, चांदनी, शिवांशी, सीमा, हाशिम, अमर, संदीप कुमार, नंदिनी, काजल, इम्तियाज, नरेंद्र, लकी, शीला, सोनम, अफरोज, रागिनी, जूली। उच्च प्राथमिक स्कूल

संदीप कुमार, सुमित, मोहित, नंदकिशोर, रामकिशोर, गुलफ्शां बानो, गुड़िया देवी, अंजली शुक्ला, सरोजनी देवी, साइबा बानो, नूरमा बानो, छिम्मी देवी, आरती देवी, कोमल देवी और सुमन देवी।

Posted By: Jagran