फूलबेहड़ (लखीमपुर) : इन दिनों शारदा नदी का पानी घटने ही लोग भले ही राहत महसूस कर रहे हैं, पर बीते दिनों आई बाढ़ में कई स्कूल पानी भरने से बंद थे। कई जगहों पर बच्चे नाव से जान जोखिम में डाल कर स्कूल को जाते थे।

इलाके में बाढ़ का कहर थमा तो लोगों ने राहत की सांस ली। कुछ दिनों पहले आई बाढ़ से जंगल नंबर 10, खगईपुरवा, बड़ागांव व करदहिया मानपुर के विद्यालय बंद रहे। बाढ़ की वजह से बच्चे घरों से नहीं निकल पा रहे थे। वहीं कई जगह अध्यापक स्कूल नहीं पहुंच पा रहे थे। इच्छाराम पुरवा के करीब चालीस बच्चे

गौरा के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ते हैं। इच्छाराम पुरवा से स्कूल आने के लिए गांव से बांध तक पानी पड़ता है। इसलिए यहां के बच्चे अपनी जान जोखिम में डाल कर नाव में बैठ कर गौरा स्कूल को पढ़ने आते हैं। जबकि ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने केवल एक नाव दी है, लेकिन बच्चे ज्यादा हैं। इसलिए उनके पास अपनी नाव भी है, जिससे बच्चों को स्कूल भेजने के लिए आना पड़ता है। पिछले दिनों नरहर के पास नाव का हादसा होने के बाद बच्चे डर गए थे। हालांकि अब पानी कम पड़ गया है, तो बच्चों को नाव में बैठाकर स्कूल छोड़ना पड़ता है। करीब दस दिनों तक बंद रहे विद्यालयों में पुन: शिक्षण कार्य चालू हो चुका है। सभी विद्यालय

सोमवार को खुले एवं सभी विद्यालयों में बच्चे पहुंचे। पानी कम पड़ने से इलाके में अब बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है। टिकाऊ पानी की वजह से मच्छरों की भरमार है। लोगों का कहना है कि अभी तक मच्छर मारने की दवा का छिड़काव नहीं हो सका है, जिससे मलेरिया बुखार फैलने की आशंका बनी हुई हैं।

Posted By: Jagran