भीरा (लखीमपुर): शारदा नदी अब तेजी से कटान करती हुई जगन्नाथ टांडा की ओर बढ़ रही है। नदी यहां से केवल 30 मीटर दूर ही बह रही है। अगर जल्द ही ¨सचाई विभाग द्वारा कोई इंतजाम नहीं किए गए तो छंगा टांडा और जंगल नंबर सात की तरह यह गांव भी कट जाएगा।

छंगा टांडा, जंगल नंबर सात को तबाह करने के बाद भी नदी के तेवर नरम नहीं पड़ रहे हैं। बीती रात नदी ने जंगल नंबर सात स्थित प्राथमिक विद्यालय चमरौधा को भी लील लिया। कई दिनों से नदी इस स्कूल को निशाने पर लिए हुए थी। नदी अब जगन्नाथटांडा की ओर बढ़ने लगी है जिससे इस गांव के बा¨शदों में हाहाकार मच गया है। ग्रामीण अपने हाथों से कच्चे, पक्के मकानों को उजाड़कर पलायन करने में लगे हैं। कटान रोकने के लिए ¨सचाई विभाग द्वारा कोई ठोस उपाय नहीं किया जा रहा है। दो गांव कट गए और विभाग का कोई जिम्मेदार यहां झांकने तक को नहीं पहुंचा। अगर अब भी कोई कदम नहीं उठाया गया तो जगन्नाथ टांडा का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा। कटान पीड़ित सड़कों के किनारे डेरा डाले हुए हैं। गांव से विस्थापितों के लिए अब तक जमीन, आवास की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। क्षेत्रीय विधायक रोमी साहनी ने इलाके का दौरा कर कटान पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने पीड़ितों के लिए भोजन के इंतजाम तो करवा दिए हैं, लेकिन और कोई राहत नही दिलवा सके है।

फूलबेहड़ संवादसूत्र के अनुसार शारदा नदी का जलस्तर कम पड़ गया है। नदी का जलस्तर कम पड़ने से शारदा नदी ने फिर से कटान चालू कर दिया है।

फूलबेहड़ क्षेत्र में शारदा नदी ने जंगल नंबर 11 में कटान शुरू कर दिया है। नदी अब फिर से फसलों को निशाना बना रही हैं। गांव के लक्ष्मी की दो एकड़, विनोद की एक एकड़, रमाकांत की एक एकड़,नंदलाल की दो एकड़ गन्ने की फसलें नदी में समा गयी। कुछ दिनों पहले हुए कटान में तमाम लोगों की फसलें नदी में समा गई।अब फिर से नदी ने कटान चालू कर दिया है। जंगल नंबर 11 में गांव के किनारे बना शशिकांत का घर नदी के निशाने पर है। नदी मकान के बिल्कुल पास पहुंच गई है। किसी भी वक्त मकान को खतरा पैदा हो सकता है।

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