लखीमपुर : कोरोना की पिछली दो लहरों ने जिले को झकझोर करके रख दिया है। इसमें जिले में हजारों लोग बीमार हुए। उन्हें जिले के इकलौते कोविड एल-2 हास्पिटल में भर्ती कराया गया। इसमें से कई की मौतें भी हुईं, लोगों ने अपनों को खोया। इस बीच सबसे ज्यादा कमी आक्सीजन की अखरी थी, जिसमें आक्सीजन बाहर से न केवल मंगानी पड़ी थी, बल्कि समाजसेवियों ने भी आक्सीजन दिलाने में मदद की थी। बाद में आक्सीजन सिलिडर भरने के लिए 10 प्वाइंट का प्रस्ताव शासन से पास हुआ और जिले में उन्हें बनाने का काम भी शुरू हुआ। ये काम लगभग पूरा होने को है।

जिले में करीब 24396 लोग कोविड महामारी से प्रभावित हुए थे। इसमें पहली लहर में 7849 और दूसरी लहर में 16547 लोग चपेट में आए थे। इस दौरान बाराबंकी और आसपास जिलों से स्वास्थ्य विभाग ने कोविड मरीजों के लिए आक्सीजन के सिलिडर भी मंगाए थे, करीब ढाई सौ के आसपास सिलिडर मंगाए गए थे। इसके अलावा समाजसेवियों ने भी इसमें सहयोग किया था। इन्होंने की थी आक्सीजन दिलाने में मदद

खीरीटाउन के एजाज असलम ने अपने आक्सीजन प्लांट से सिलिडर उपलब्ध कराए थे, तो वहीं समाजसेवी मोहन वाजपेयी ने भी आक्सीजन के सिलिडर मरीजों के लिए उपलब्ध कराकर उनकी जान बचाने में सहयोग किया था। वाईडी कालेज में छात्र नेता रह चुके जय सिंह ने भी बाहर से आक्सीजन मंगाकर मरीजों की जान बचाने में पूरी मदद की थी। तीसरी लहर से लड़ने के लिए पूरे प्रबंध मुख्य चिकित्साधिकारी डा. शैलेंद्र भटनागर बताते हैं कि तीसरी लहर से लड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास पूरे प्रबंध मौजूद हैं। 250 बेड उपलब्ध हैं। आक्सीजन की व्यवस्था कर ली गई है। उन्होंने बताया कि पूरे जिले में आक्सीजन सिलिडर भरे जाने के लिए 10 प्वाइंट बनाए गए हैं। इसमें से लगभग छह तैयार हैं। चार निर्माणाधीन हैं, जो जल्दी ही बना लिए जाएंगे। ये आक्सीजन प्वाइंट हैं तैयार

जिले में बनकर तैयार आक्सीजन प्वाइंट में फरधान, मितौली, नकहा, मोहम्मदी के आक्सीजन प्वाइंट हैं। इन्हें जब चाहेंगे तब शुरू कर देंगे। इसके अलावा पलिया, निघासन में भी लगभग पूरे हो चुके हैं। कुछ दिनों में ही बनकर तैयार हो जाएंगे। जिला मुख्यालय में लखीमपुर जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, कस्बा ओयल के 200 बेड वाले मातृ शिशु अस्पताल का आक्सीजन केंद्र व गोला सीएचसी का आक्सीजन प्वाइंट अभी निर्माणाधीन हैं। कोरोना से बचाव के सारे प्रबंध देख रहे अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरपी दीक्षित बताते हैं कि जल्द ही यह सभी ऑक्सीजन प्वाइंट बनकर तैयार हो जाएंगे। इससे मरीजों के इलाज में मदद मिलेगी।

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