लखीमपुर : वाईडी कालेज में शुरू हुई दो दिनी 'उत्तर मध्यकालीन भारत में हिदी साहित्य और सौंदर्य ²ष्टि का अस्मिता संघर्ष पर विचार गोष्ठी में लखनऊ में चल रहे दैनिक जागरण के संवादी कार्यक्रम की झलक नजर आई। यहां इस विषय पर विद्वानों ने जमकर चर्चा की। विषय पर खुलकर बोले और कहा कि चर्चा से कई विवादों का निराकरण संभव है। प्रस्तुत है आमंत्रित विद्वानों की चर्चा के प्रमुख अंश..

पाठ्यक्रम से जुड़ा विषय है हिदी साहित्य का इतिहास विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता है। मध्यकाल को लेकर बीच में जो विवाद पैदा हो गए थे उन पर सेमिनार के बहाने जो चर्चा की जाती है, उसमें उन विवादों का निराकरण किया जाता है, इससे विद्यार्थियों को एक नई जानकारी मिलती है।

डॉ. सूर्य प्रसाद दीक्षित, सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष हिदी, लखनऊ विश्वविद्यालय

साहित्य के साथ-साथ विद्यार्थियों को इतिहास संस्कृति कला वैचारिक परिवर्तन की समझ होनी चाहिए चर्चा से इसमें मदद मिलती है अपने देश के साथ वैश्विक परिवेश को समझने की जिज्ञासा सेमिनार के जरिए विकसित होती है।

प्रो. डॉ. रामदेव शुक्ल, सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष, गोरखपुर विश्वविद्यालय

साहित्य का अध्ययन करने का एक निश्चित ढर्रा बन जाता है, एक परिपाटी बन जाती है, इसको तोड़ने और अपनी नयी ²ष्टि से देखने की एक पहचान बनती है। हर युग में साहित्य देखने की समझ, एक नई ²ष्टि होती है इन सबमें ऐसी चर्चाएं विद्यार्थियों के लिए नई सोच पैदा करेंगी।

डॉ. सदानंद गुप्ता, अध्यक्ष हिदी संस्थान, उत्तर प्रदेश

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