लखीमपुर: मितौली ब्लॉक में पौधारोपण में हुई वित्तीय अनियमितता के नए-नए राज खुल रहे हैं। वन विभाग की नर्सरियों से एक पौधा सात रुपये में नहीं खरीदा गया, जबकि ग्राम निधि के मनरेगा बजट से एक पौधे के लिए 70 रुपये तक खर्च किए गए। इसकी पुष्टि पौधों की जियो टैगिग के दौरान भी मिली थी। पूरे मामले में कमिश्नर तक शिकायत की गई है। सीडीओ अरविद सिंह के सामने जब यह मामला आया तो उन्होंने इसकी जांच के लिए अध्यक्ष डीडीओ अरविद कुमार और डीएसटीओ राजेश सिंह की कमेटी गठित कर दी।

डीडीओ अरविद कुमार पूरे प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट सीडीओ को सौंप चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में पौधारोपण में वित्तीय गड़बड़ी सामने आई है। जिसमें यह पता चला है कि शासन के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए मितौली ब्लॉक में पौधे वन विभाग की नर्सरियों से नहीं खरीदे गए, बल्कि मलिहाबाद से पौधे खरीद कर अमरूद और नींबू के पौधे के लिए 70 रुपये तक का भुगतान ग्राम निधि के बजट से किया गया।

नियमानुसार खरीद सकते हैं पौधे

उपायुक्त मनरेगा व प्रभारी बीडीओ राजनाथ भगत का कहना है कि पौधा खरीदने के लिए ग्राम पंचायत अधिकृत है। प्रधान व सेक्रेटरी ग्राम पंचायत की जरूरत के मुताबिक अलग-अलग प्रजातियों के पौधे क्रय और रोप सकते हैं। उनकी कार्ययोजना में प्रस्ताव पारित किया जाता है। वन विभाग की नर्सरी में सागौन और पापुलर आदि पौधे होते हैं। यहां अमरूद, अनार आदि के पौधे लगाए गए हैं। इस संबंध में जवाब ग्राम पंचायतों को ही देना है।

डीएसटीओ ने कहा, हमने नहीं की जांच

सीडीओ द्वारा गठित कमेटी में डीएसटीओ राजेश सिंह भी शामिल हैं लेकिन, उन्होंने एक दिन भी इसकी जांच नहीं की है। कमेटी के गठन का मतलब यही है कि जांच में सभी का अपना बिदुवार मत होता है। डीडीओ ने उन्हें दो बार मौखिक रूप से चलकर जांच करने के लिए कहा लेकिन, कभी उनकी तरफ से लिखित रूप से जांच के लिए नहीं आया।

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