लखीमपुर : जिले में गोला तहसील क्षेत्र में दो दिनों में आठ कौवे मृत मिले हैं। इससे लोगों में दहशत है।

कोरोना वायरस की दहशत के बीच बर्ड फ्लू ने भी अपने पैर फैलाने शुरू कर दिए है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ टीके तिवारी ने बताया कि तीन मृत कौवों की पूरी बॉडी को हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज डायग्नोस्टिक लैब भोपाल जांच के लिए भेजा जा रहा है। पक्षियों के 60 ब्लड सैंपल पशु चिकित्सालय मैलानी, अलीगंज, संपूर्णानगर, बांकेगंज,भीरा, उचौलिया व फूलबेहड़ से लिए गए हैं। जिन्हें आइवीआरआइ बरेली भेजा जा रहा है। डीएम शैलेंद्र सिंह ने पशुपालन एवं वन विभाग को निर्देश दिए है कि आपसी तालमेल से बर्ड फ्लू से संबंधित सूचना प्राप्त कर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें। जिले में जिन जगहों पर बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी आते हैं। ऐसे स्थानों पर विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। ग्रामीण क्षेत्र में बर्ड फ्लू से रोकथाम एवं बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाए। पोल्ट्री फार्म वाले स्थानों पर निरंतर निगरानी रखी जाए। ठंड में होता है बर्ड फ्लू

सदर पशु अस्पताल के पशु चिकित्सक डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि बर्ड फ्लू के मामले आमतौर पर ठंड में ही देखने को मिलते हैं। जैसे-जैसे ठंड कम होगी बीमारी भी कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी तक कहीं भी इंसानों में बर्ड फ्लू की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सभी को सतर्क रहने की जरूरत है। विशेष सतर्कता बरतें

मार्च तक पक्षियों पर विशेष सतर्कता बरतें। बीमार पक्षियों को हमेशा स्वस्थ पक्षियों से अलग रखें। बर्ड फ्लू से पक्षी के मरने की शंका होने पर पोस्टमार्टम न करें । पक्षियों में अत्यधिक मृत्यु होने पर पशु चिकित्साधिकारी को सूचित करें। मृत पक्षियों को गहरे गड्ढे में ऊपर से चूना डाल कर दफना दें। इस दौरान दस्ताने तथा फेस मास्क, पीपीई किट का उपयोग करें। अच्छी तरह से पकाए हुए कुक्कुट एवं कुक्कुट उत्पाद, अंडा आदि का उपभोग करें। पक्षियों को हैंडिल करने के बाद हाथों को डिटरजेंट, एंटीसेप्टिक सोल्यूशन से अच्छी तरह धोएं। क्या न करें

मृत एवं संक्रमित पक्षी के पास न जाएं । बर्ड फ्लू से पक्षी के मरने का संदेह होने पर उसका पोस्टमार्टम न करें। कच्चे कुक्कुट एवं कुक्कुट उत्पाद का प्रयोग न करें । कुक्कुट फार्म पास-पास न खोलें। कम से कम 500 मीटर का फासला रखें। मृत पक्षियों को खुले में न फेकें, बल्कि गहरे गड्ढे में दाबकर ऊपर से चूना डालकर दफना दें। कुक्कुट फार्म के आसपास झाड़ियां न उगने दें। बाहरी एवं जंगली पक्षियों को फार्म पर न आने दें। फार्म के आसपास पानी का तालाब न बनने दें , जिससे कि पानी एकत्र न हो।

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