लखीमपुर : ग्राम पंचायतों में संचालित होने वाली योजनाओं में भ्रष्टाचार का मामला सामने आने के बाद ईसानगर में तैनात तत्कालीन खंड विकास अधिकारी पीयूष मोहन श्रीवास्तव को बर्खास्त कर दिया गया है। इन पर स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना में घपला करने 29 आरोप लगे हैं खंड विकास अधिकारी को जांच के दौरान कई बार दस्तावेज सहित उपस्थित होने के निर्देश दिए गए लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जिसके बाद राज्यपाल से अनुमति मिलने के बाद उन्हें सेवा से मुक्त कर दिया गया।

अपर आयुक्त (प्रशासन) कानपुर मंडल की जांच में पाया गया कि अपनी तैनाती के दौरान खंड विकास अधिकारी ईसानगर में बने अपने आवास में नहीं रहते थे। लखीमपुर शहर में रहने के कारण प्रतिदिन कार्यालय नहीं पहुंचते थे। स्वर्ण जयंती योजना के अंतर्गत एक जनवरी 2013 को 148.29 लाख अवशेष था, पांच लाख प्रशिक्षण के लिए दिया गया। इसके सापेक्ष 87.09 का व्यय दर्शाया गया। 61.20 लाख अवशेष दिखाया गया। जांच में वित्तीय अनियमितता के लिए बीडीओ को दोषी पाया गया। स्वरोजगार योजना की प्रविष्टियों में सफेदा लगाकर छेड़छाड़ की गई। 2009-2010 में इंदिरा आवासों 321 आवास छत तक, 209 आवास लिटर तक, 230 आवास नींव तक तथा 112 आवास अनारम्भ पाए गए। बीडीओ ने लाभार्थियों से न तो आवेदन और न ही शपथ पत्र लिया। जो निर्देशों के विपरीत है। पाया गया कि बीडीओ ने सुनियोजित तरीके से धनराशि का दुरुपयोग किया गया। इस तरह खंड विकास अधिकारी पीयूष मोहन श्रीवास्तव के खिलाफ 29 आरोपों की पुष्टि हुई उनका पक्ष जानने के लिए कई बार जांच अधिकारी ने उन्हें नोटिस जारी की लेकिन कभी वह प्रस्तुत नहीं हुए और ना ही कभी स्पष्टीकरण का जवाब दिया। मौजूदा समय में खंड विकास अधिकारी पीयूष मोहन बांदा जिले में तैनात थे उनके बर्खास्तगी की सूचना शासन ने सीडीओ अरविद सिंह को भी भेजी है।

Posted By: Jagran

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