गोलागोकर्णनाथ (लखीमपुर खीरी), ग्रीष्म काल में पशुओं के लिए भोजन की समस्या न हो इसके लिए पशुपालक व्यवस्था में लगे हैं। स्वास्थ्य व दुग्ध उत्पादन के लिए हरा चारा और पशु आहार आवश्यक है। हरे चारे की वर्ष भर उपलब्धता नहीं हो पाती है। आम कृषक की निर्भरता धान के पुआल व गेहूं के भूसे पर बढ़ती जाती है। तकरीबन गर्मियों व बरसात के छह महीनों तक के लिए किसान भूसे का स्टाक कर लेता है। ताकि हरे चारे के साथ अथवा उसके विकल्प के रूप में भूसे का उपभोग कर सके। उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुभाष जायसवाल का मत है कि इनमें पोषक तत्व बहुत कम होत हैं और प्रोटीन की मात्रा चार प्रतिशत से भी कम होती है। यूरिया उपचारित भूसे में प्रोटीन की मात्रा तकरीबन नौ प्रतिशत तक बढ़ जाती है और नियमित दिए जाने वाले महंगे पशु आहार में तीस प्रतिशत तक की कमी आसानी से हो जाती है। डॉ. प्रताप सिंह प्रभारी कृषि विज्ञान शोध प्रक्षेत्र जमनाबाद का कहना है कि एक हजार किलो भूसे के उपचार के लिए चालीस किलोग्राम यूरिया और चार सौ लीटर पानी की आवश्यकता होती है। इस उपचार के लिए सबसे पहले चार किलो यूरिया चालीस लीटर पानी का घोल बनाएं। फिर सौ किलो भूसे की तीन-चार इंच मोटी परत के ऊपर हजारे से उक्त घोल को फैलाएं और भूसे को अच्छी तरह पैरों से चलाते हुए दबाते जाएं। इस प्रकार एक के ऊपर एक सौ-सौ किलो भूसे की परतें बनाकर प्रत्येक बार मिश्रण डाले और भूसे को दबाने की प्रक्रिया करते हुए लगभग दस परतें एक के ऊपर एक तैयार करें। उन्होंने बताया कि इसके पश्चात उपचारित भूसे को प्लास्टिक शीट या सूखी मिट्टी पुआल डालकर अथवा गोबर या गीली मिट्टी से लीप देवें। ताकि बाद में बनने वाली गैस किसी भी तरह से बाहर न निकल सके। इसके साथ ही पशु धन प्रसार अधिकारी प्रभात कुमार रस्तोगी ने इस यूरिया उपचारित भूसे के प्रयोग के बावत कुछ हिदायत देते हुए कहा कि गर्मी में 21 दिन व सर्दियों में 28 दिन बाद ही ढेर को खोलें और खुली हवा में फैला दें। प्रारंभ में यह मिश्रण थोड़ा खिलाकर जानवर को अभ्यस्त बनाए और कभी भी यूरिया को सीधे खिलाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। यह पशु के लिए जहर हो सकता है। दुधारू पशुओं को अतिरिक्त आहार के रूप में एक किलो पशु आहार प्रतिलीटर दूध वृद्धि के लिए खिलाया जाना आवश्यक है।

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