कुशीनगर : जल ही जीवन है। जल के बिना जीवन अधूरा है। इसे सुरक्षित करने के लिए बारिश के जल का संचय करने की जरूरत है, यह तभी संभव होगा, जब आमजन आगे आएं। थोड़ी सी लापरवाही आने वाले कल के लिए संकट के रूप में खड़ी होगी। जनपद में जल स्तर लगातार गिर रहा है। पर, इससे निपटने को लेकर जागरूकता का अभाव दिख रहा है। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में कहीं भी वर्षा जल संचयन के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम नहीं लगा है।

जिले में निजी भवनों व सरकारी दफ्तरों में भी बारिश का पानी बर्बाद हो रहा है। गांव से लेकर नगरीय क्षेत्रों में जल की इस बर्बादी के प्रति कोई भी गंभीर नहीं है। अगर यही हाल रहा तो आगामी कुछ वर्षों में पीने योग्य पानी नहीं मिलेगा।

भूगर्भ जल स्तर में सुधार का लें संकल्प

सभी संकल्प लें कि जल स्त्रोतों को फिर से पुराने स्वरूप में लौटाएंगे। बचे हुए ताल-तालाब, पोखरा, नदियां व कुंआ को संरक्षित करते हुए बारिश के पानी का संरक्षण करेंगे, ताकि गिरते हुए जल स्तर में सुधार हो सके। दशकों पूर्व 20 से 30 फीट के बीच पाइप लगाने के बाद पीने योग्य पानी मिल जाता था। अब तो 70 से 90 फीट गहराई के बाद भी पीने योग्य पानी नहीं मिल पा रहा है।

जल स्त्रोतों को बचाना होगा

भूगोल विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डा.सीबी सिंह कहते हैं कि जल के सभी स्त्रोतों को बचाने की पहल करने से भूगर्भ जल स्तर में आ रही गिरावट से बचा जा सकेगा। इसके लिए तालाब, पोखरों व नदियों की सिल्ट सफाई करा बरसात के पानी को संरक्षित करने की जरूरत है।

यह है रेनवाटर हार्वेस्टिग सिस्टम

वर्षा जल संचित करने के लिए छत के बरसाती पानी को गड्ढे या खाई के जरिये सीधे जमीन के भीतर उतारना होता है अथवा छत के पानी को किसी टैंक में एकत्र कर सीधे उपयोग में लेना होता है। इससे भूजल स्तर में सुधार होगा, जल स्तर में वृद्धि होगी।

सीडीओ अनुज मलिक ने कहा कि जल संरक्षण को लेकर लोगों को खुद संकल्प के साथ दूसरों को भी प्रेरित करना होगा। पोखरे व तालाब में जल संचय करने को लेकर गंभीर होना होगा।

Edited By: Jagran