कुशीनगर : पवित्र श्रावण मास की तैयारी शुरू हो गई है। कुबेरधाम, करहिया व सिधुआ स्थान शिव मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या को देखते हुए तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। शनिवार को दिन भर शिव मंदिरों में सफाई कार्य चलता रहा। सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं। मान्यताओं के अनुसार श्रावण भक्तों के आशाओं-इच्छाओं की पूर्ति का मास है। भोलेनाथ का यह सर्वाधिक प्रिय महीना है। श्रावण में ही देवी सती अपनी कठिन तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न कर, उन्हें पति रुप में प्राप्त की थीं।

जलाभिषेक के बारे में मान्यता है कि समुद्र मंथन में निकले कालकूट नामक हलाहल विष को विश्व के कल्याण के लिए शिवनाथ ने पान कर लिया था। विष पान से उनका कंठ नीला पड़ गया और उनके तन-मन का ताप बढ़ने लगा। उसे शांति प्रदान करने के लिए सर्वप्रथम भगवान श्री हरि विष्णु ने विभिन्न सामग्रियों से उनका जलाभिषेक किया। शीतलता प्राप्त करने के लिए अवघड़दानी ने चन्द्रमा को अपने सिर पर धारण किया। वहीं देवराज इन्द्र ने आदिदेव के ताप को शांत करने के लिए घनघोर वर्षा की। तभी से रुद्राभिषेक की परंपरा चलने लगी। आचार्य पं. अवनीश त्रिपाठी एवं पीताम्बरा शक्तिपीठ के मठाधीश्वर पं. शिवशंकर पाठक ने बताया कि हरिशयनी एकादशी से लेकर देव-उत्थानी एकादशी के चतुर्थ मास तक भगवान विष्णु क्षीरसागर में योग निद्रा करने जाते समय, इस अवधि में जगत के पालन-पोषण का दायित्व भगवान श्री रुद्र को सौंप देते हैं। सुप्रसिद्ध श्री शिव शक्ति कुबेरनाथ धाम सहित अन्य देवालयों में पूरे एक माह तक भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। व्रत रह कर श्रद्धालु शिवलिग पर शहद, दुग्ध, घृत, दही, गन्ने का रस, गंगाजल, चंदन आदि चढ़ा जलाभिषेक करते हैं। इस काल में प्रकृति की हरियाली व सुंदरता को देख मन प्रसन्न हो जाता है।

अराजक तत्वों पर पैनी नजर : एसपी

एसपी सचिन्द्र पटेल ने कहा कि श्रावण मास को लेकर जिले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रसिद्ध कुबेरधाम, करहिया स्थान, सिधुआ स्थान सहित प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। अराजक तत्वों पर पुलिस की पैनी नजर है। मंदिरों पर पर्याप्त संख्या में महिला व पुरुष पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।

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