कुशीनगर: बदलते मौसम के कारण इन दिनों सरकारी और निजी अस्पतालों में सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार और वायरल से पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। दिन में तेज धूप से गर्मी, दोपहर बाद तापमान का गिरना और रात में ठंडी होने के कारण मौसमी बीमारियों की चपेट में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक आ रहे हैं।

मौसम का अधिकतम तापमान 34 और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस तक रह रहा है। एक निजी अस्पताल के संचालक ने बताया कि इन दिनों मौसमी बीमारियों के मरीज ज्यादा पहुंच रहे हैं। पहले रोजाना सौ मरीज ओपीडी में इलाज कराने पहुंचते थे। अब यह संख्या बढ़कर 200 से 250 तक पहुंच गई है। इनमें अधिकांश मरीज सर्दी, खांसी, जुकाम और वायरल से पीड़ित रह रहे हैं।

सरकारी अस्पताल में भी यही स्थिति है। सीएचसी प्रभारी मारकंडेय चतुर्वेदी ने बताया कि इन दिनों मौसमी बीमारियों के मरीज ज्यादा पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकांश सर्दी, खांसी, जुकाम और वायरल से पीड़ित हैं।

सीएचसी कसया में एक साल के बेटे का इलाज कराने आई फूलमती निवासी हेतिमपुर ने बताया कि बच्चे को सर्दी, जुकाम तथा बुखार आ रहा है। नीलम देवी निवासी मंगलपुर ने बताया कि वह छह माह की गर्भवती है। बुखार आ रहा है। चिकित्सक ने वायरल फीवर बताया है। एक सप्ताह की दवा दी है। पुन: चेकअप के लिए बुलाया है। चंद्रावती निवासी सेमरा धूसी को दांत में दर्द और बुखार था। उन्होंने बताया कि डाक्टर ने दवा लिखी है। दवाएं अस्पताल से ही मिल गई है। अर्पित वर्मा निवासी भलुही मदारी पट्टी ने बताया कि सिर दर्द और बुखार से पीड़ित हूं। कोरोना काल में भय सता रहा है। चिकित्सक ने वायरल बताया है।

सावधानी ही बचाव का सर्वोत्तम उपाय

वरिष्ठ चिकित्सक डा. जीपी राय ने बताया कि ठंड व गर्म मौसम के कारण लोग सर्दी, जुकाम, वायरल और डायरिया के शिकार होते हैं। बदले मौसम में फ्रीज का पानी और कोल्ड ड्रिक पीने से परहेज करें। धूप से बचें, पानी का सेवन ज्यादा करें, पानी में इलेक्ट्राल पाउडर या ग्लूकोज मिलाकर पिएं, इन दिनों हल्का और ताजा भोजन करें। बासी या ज्यादा देर का बना भोजन न खाएं। अभी मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ेगी। सावधानी ही बचाव का सबसे उत्तम उपाय है। ऐसे करें बचाव

शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखने के लिए अत्यधिक तरल पदार्थ लें। घर में बना हुआ नींबू पानी व ओआरएस के घोल का प्रयोग करें। एल्कोहल और कैफीन युक्त पेय पदार्थो का परहेज करें। तेज अल्ट्रा वायलेट किरण व धूप से बचने के लिए धूपी चश्मा व हैट लगाएं। नवजातों के शरीर को ज्यादा ढककर रखें व सूती कपड़े ही पहनाएं।

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