नारायणी नदी का कहर: कुशीनगर में फसलें और बांध खतरे में, ग्रामीणों में दहशत
नारायणी नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव से कुशीनगर में फसलों और बांधों पर कटान का खतरा बढ़ गया है, जिससे ग्रामीण सहमे हुए हैं।

HighLights
नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ने से फसलों का कटान जारी।
बाघाचौर सहित कई स्थानों पर बांधों पर बढ़ा दबाव।
किसानों की फसलें बर्बाद, मुआवजे को लेकर चिंता।
जागरण संवाददाता, कुशीनगर। नारायणी के जल स्तर में उतार-चढ़ाव से नदी फसलों को तेजी से काटते हुए बांध के करीब पहुंचती जा रही है। शनिवार की तुलना में जल स्तर में वृद्धि के कारण खेत व फसल की कटान करते हुए नदी का स्पर व नोज पर दबाव बढ़ गया है। रविवार को डिस्चार्ज में पांच हजार की वृद्धि हुई है, जिससे डिस्चार्ज 82 हजार क्यूसेक पहुंच गया है।
एपी बांध के बाघाचौर के पास किमी 10.518 के पास मरम्मत होने के बाद अब नदी खेत और फसलों की कटान कर रही है। किमी 4.00 के पास सिकंदर यादव, खटमल सहित आठ से अधिक किसानों की फसल बर्बाद हो चुकी है। अहिरौलीदान के कचहरी टोला, नोनिया पट्टी, खैरखूंटा आदि टोलों के सामने भी कटान हो रही है।
किमी 3.500 से 4.00 के पास भी खेतों और फसलों को काटने के बाद नदी स्पर और बांध से सटकर बह रही है। जवही दयाल के मुसहर टोली, चैन पट्टीघाट, बीरवट कोन्हवलिया के समीप कटान शुरू हो गया है। नरवाजोत बांध के किमी 1.700 पर बने स्पर का नोज और बांध पर नारायणी का दबाव बना हुआ है।
एसडीओ दीप रतन सिंह ने कहा कि जहां दबाव है, वहां निगरानी बढ़ा दी गई है। बांध पर सभी संसाधन मौजूद है। दूसरी ओर ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि नदी फसलों को लगातार काट रही है। फिर अब तक हुई क्षति का राजस्व विभाग के पास कोई आंकड़ा नहीं है, जिससे मुआवजा मिलने की संभावना नहीं दिख रही है।
बाढ़ प्रभारी अशोक वर्मा ने कहा कि कितना कृषि भूमि नदी में कटी है। उसके बारे में संबंधित लेखपालों से रिपोर्ट मांगी गई है।
