कुशीनगर: नेपाल के वाल्मीकि नगर बैराज से गुरुवार को 3.96 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से नारायणी नदी फिर उफना गई है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। खड्डा तहसील के दस से अधिक गांवों में नदी का पानी घुस गया है। बसंतपुर से सोहगीबरवा जाने वाला मार्ग भी बाढ़ के पानी से डूब गया है।

नारायणपुर व बालगोविद छपरा गांव के पास नदी का दबाव बना हुआ है। खड्डा तहसील के शाहपुर, विध्याचलपुर, बसंतपुर, मरिचहवा, महदेवा आदि गांवों में पानी घुस गया है। एसडीएम खड्डा अरविन्द कुमार ने तहसीलदार डॉ. एसके राय व नायब तहसीलदार डॉ. रवि कुमार यादव के साथ महदेवा, सालिकपुर, छितौनी आदि गांवों का दौरा कर जरूरी निर्देश दिए। बुधवार की शाम चार बजे पानी का डिस्चार्ज 1.72 लाख क्यूसेक था। 24 घंटे में ढाई गुना बढ़ गया। छितौनी में नदी का जलस्तर खतरे के निशान 95.95 मीटर से पांच सेमी नीचे है।

उधर पिपराघाट-नरवाजोत मार्ग पर नदी का कटान तेज हो गया है। नरवाजोत एक्सटेंशन बांध व एपी बांध के जंगली पट्टी के सामने बाघाचौर व अहिरौलीदान में स्थिति संवेदनशील बन गई है। अमवाखास बांध के बरवापट्टी रिग बांध और लक्ष्मीपुर के सामने मुख्य बांध को बचाने के लिये बने स्पर पर नदी का दबाव बना हुआ है। इसे लेकर ग्रामीण चिंतित हैं। इससे रामपुरबरहन, दरोगाडीह, परोरही, धनुखटोली, गोबरही, बरवापट्टी, खैरटिया, गोबरही, बिचपटवा, दशहवा आदि गांवों के प्रभावित होने की आशंका है।अधिशासी अभियंात बाढ़ कुशीनगर ने कहा कि डिस्चार्ज बढ़ने से बांध के जर्जर स्थानों पर मरम्मत कार्य कराया जा रहा है। विभागीय अधिकारी कैंप कर रहे हैं। अभी खतरे की बात नहीं है।

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