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कुशीनगर: बरसात मतलब पानी की धार, जिसे जुड़ी है हमारे जीवन की पतवार। हर बार बरसात में आसमान से जमीन पर गिरती धार को हम संजो नहीं पाते और हमारे जीवन की पतवार हमसे दूर होती जा रही है। जल के बिना जीवन संभव नहीं, यह हम बखूबी जानते हैं, बावजूद इसके बारिश के रूप में बरसने वाली जीवन की धार को हम पकड़ते नहीं। बरसात का पानी नालों और नालियों आदि में जाकर बर्बाद हो जाता है। गांव-नगर की गलियों व नालियों से होकर हमारे जीवन की धार, मतलब पानी बहकर चला जाता है, क्योंकि हमारे पास इसकी कोई तैयारी ही नहीं होती। हम जागरूक नहीं हैं। ऐसे में जीवन देने वाला पानी बर्बाद हो रहा है तो हमारे जीवन की जीवंतता को बयां करने वाले पोखरों की गोद सूख गई है। हमने जीवन देने वाली पोखरे की कोख को बांझ सा बना दिया है। अबकी हम ऐसा नहीं होने देंगे। संकल्प लेकर बढ़ेंगे और जीवन की बरसने वाली पानी रूपी धार को पकड़ जीवन की पतवार बनाएंगे।

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प्रशासन के साथ कदमताल कर बचाएं जीवनदायिनी पोखरे

कैचवर्ड: आओ गढ़ें तालाबी पडरौना : हर बार बारिश होती है और धरा की गोद भरने का कागजी कार्य तेज होता है। पोखरों की खोदाई की जाती है कि वर्षा का जल संचयन होगा। खोदाई कर प्रशासन अपना कोरम पूरा कर लेता है, बारिश का जल भरा कि नहीं झांकने की जहमत नहीं उठाता। हम भी इस पर कोई पहल नहीं करते। ऐसे में पोखरे आसमान की ओर अपनी गोद भरने को लेकर ताकते और प्यासे रह जाते हैं। यदि प्यास मिटी भी तो चंद दिनों के लिए क्योंकि इनमें बराबर पानी बना रहे, इसका कोई सरकारी या गैर सरकारी जतन ही नहीं होता। बारिश का वह पानी जो इन पोखरों तक गांव व नगर की गलियों से होकर पहुंचना चाहिए, हमारी तैयारी न होने के कारण बर्बाद हो जाता है। पोखरे बस बारिश के पानी आने की राह ताकते रह जाते हैं। विभाग इस बार 150 पोखरों की खोदाई करा रहा है। मकसद फिर वही है, जल संचयन। बारिश के पानी से इनकी गोद भरना। इस बार हमें प्रशासन के साथ कदमताल करना होगा ताकि पोखरे जीवंत हो सकें। बारिश का पानी बर्बाद न हो इसको लेकर हमें खुद भी पहल करनी होगी। प्रशासन को मजबूर करना होगा कि वह ऐसी व्यवस्था बनाए कि पोखरों का पानी सूखे तो उसको भरने का वैकल्पिक इंतजाम हो। अपना योगदान भी देने का कार्य करना होगा। नहीं तो फिर हर बार की तरह खोदे गए पोखरे दिखेंगे तो जरूर, लेकिन जल ही जीवन की परिभाषा नहीं बता सकेंगे।

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पोखरा गढ़ना पुनीत कार्य, सभी करें सहयोग

फोटो 5 पीएडी- 49- डा. अनिल कुमार सिंह

- जिलाधिकारी डा. अनिल कुमार सिंह कहते हैं कि हम पूरे जिले में डेढ़ सौ पोखरों की खोदाई जल संचयन के लिए करा रहे हैं। यह कार्य हर साल किया जाता है। इसको हम पूरी ईमानदारी से करते भी हैं। यदि इसमें आमजन सहयोग करे तो पोखरों की तस्वीर और बेहतर होगी। इस सरकारी कार्य में अपना योगदान करने के लिए किसी औपचारिकता की जरूरत नहीं है। जरूरत है तो बस संकल्प के साथ आगे आने की। बात चाहे पोखरे की खोदाई करने का हो या वर्षपर्यंत जल संचयन व सरंक्षण की, किसी भी कार्य में आमजन सहयोग कर सकता है। पोखरा गढ़ना पुनीत कार्य है।

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हमारी उदासीनता से बारिश भी नहीं दे पाती इन पोखरों को संजीवनी

कैचवर्ड: आओ भरें तालाब पडरौना, कुशीनगर : हम संजीदा नहीं हैं तो जीवन के लिए पानी रूपी संजीवनी देने वाले हमारे पोखरे भी पानी की संजीदगी लिए खड़े नहीं हैं। हद तो यह है कि हमारी उदासीनता और प्रशासन की मूकदर्शिता इन पोखरों की गोद भरने को तैयार ही नहीं तभी तो बरसात में आसमान से बरसने वाली बारिश के पानी का महाकुंभ भी इन तालाबों को भर नहीं पाता। सूरज नगर का पोखरा बरसात में भी पानी के लिए तरस कर रह जाता है। पोखरे की तटबंधी है और न ही यहां तक बरसात के पानी को पहुंचाने का कोई मुकम्मल इंतजाम। ऐसे में बरसात की मूसलाधार बारिश भी इनको पानी से रसधार नहीं बना पाती। इनकी गोद सूखी की सूखी रह जाती है। यह पोखरा तो एक नजीर भर है, जिले के 1356 गांवों में कमोबेश यही तस्वीर देखने को मिलेगी। इस बार के बरसात में हमको इन पोखरों को पानी से लबालब भरने का संकल्प लेना होगा और उस पर अमल भी करना होगा। ऐसा तभी होगा जब हम आकाश से बरसने वाले पानी की धार की एक-एक बूंद को बचाएंगे और जीवन के पास लाएंगे। इसके लिए घरों से लेकर पोखरों तक तैयारी करनी होगी। जहां भी हो पानी को बर्बाद नहीं होने देंगे। ऐसे में धरा की गोद पानी से भर जाएगी। मनरेगा के तहत खोदे जा रहे पोखरे हों या किसी के निजी प्रयास से गढ़े जा रहे प्रयास हर ओर हम पानी बचाने की राह ही तैयार करेंगे, ऐसा करके दिखाना होगा। पानी से पोखरों को संजोएंगे और अपना आने वाला कल भी संवारेंगे। बस इतनी सी बात पोखरों को नया जीवन देने का कार्य करेगी।

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नहीं लगी रोक, सूखती गई जीवन की कोख

कैचवर्ड: कहां गए तालाब - तालाबों पर अतिक्रमण की मार, इसको लेकर शिकायतों की भरमार, लेकिन प्रशासन लाचार दिख रहा। इस वजह से जल स्तर को बनाए रखने में उपयोगी तालाबों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। हाईकोर्ट, प्रदेश सरकार का अतिक्रमण हटाने का आदेश प्रभावी नहीं दिख रहा। बात विशुनपुरा क्षेत्र की ही करें तो जैसे-जैसे आबादी का दायरा बढ़ रहा है वैसे-वैसे तालाबों की सीमा घटती जा रही है। वहीं आमजन की मुश्किलें भी बढ़ रहीं है। लगभग तीस फीसद तालाबों पर मिट्टी डाल कब्जा कर लिया गया है तो भवन बना लिए गए हैं। खजुरिया नंबर एक में ग्राम सभा के तालाब पर गांव के ही कुछ लोगों ने झोपड़ी व मकान बना लिया है। दूसरे टोले पर तो पोखरे का अतिक्रमण कर उसका नामोनिशान ही मिटा दिया गया है। विभाग ने नोटिस भी दे चुका है, लेकिन अभी तक अतिक्रमण मुक्त नहीं हो सका है। बगल के पिपरा बाजार के तालाब के तट पर धीरे-धीरे लोग कब्जा करने में लगे हुए हैं। विभाग को जानकारी होने के बाद कोई कार्रवाई नहीं होती।

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हर हाल में हटवाया जाएगा अवैध कब्जा

फोटो 5 पीएडी-52

पडरौना, कुशीनगर: अपर जिलाधिकारी विध्यवासिनी राय ने कहा कि पोखरों पर अवैध कब्जे की शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई की जाती है। नोटिस जारी की गई है तो इस पर से अतिक्रमण भी हटवाया जाएगा। किसी ने पक्का निर्माण कर लिया तो उसे ढहाया जाएगा। मतलब साफ है कि पोखरों का वजूद किसी भी कीमत पर नहीं मिटने दिया जाएगा। अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने का कार्य किया जाएगा। प्रशासन इसको लेकर बहुत ही संजीदा है। शासन और न्यायालय दोनों का निर्देश है, जिस पर अमल किया जाता है।

- इनका भी है अपना दर्द

- खजुरिया गांव के सत्यप्रकाश मिश्र,चंचल राय,मारकंडे गुप्ता, विरेंद्र चौबे का कहना है कि गांव के सार्वजनिक पोखरे व तालाब को कब्जा कर उसका नामोनिशान तक लोग मिटा दिए हैं। जिले के अधिकारियों से उसकी शिकायत की गई, लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।

Posted By: Jagran

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