कुशीनगर: गत एक पखवारे से एपी बांध के किनारे कटान से तांडव मचा रही नारायणी के निशाने पर ग्राम बाघाचौर व अहिरौलीदान हैं। यहां कटान की स्थिति खतरनाक होती जा रही है। ग्रामीण भयभीत हैं और पलायन की तैयारी में जुट गए हैं। विभाग उदासीन है। मानसून सत्र के लगभग दो माह पूर्व ही नदी ने खतरनाक रुख अख्तियार कर लिया है। घटते जलस्तर को हथियार बनाकर कटान को अंजाम देने लगी है। एक पखवारे से ग्राम बाघाचौर के नोनियापट्टी के सामने किमी 12.500 का स्लोप कट गया है। यहां नदी और बांध के बीच कुछ मीटर की दूरी बच गई है। इससे बांध के कटने का खतरा मंडराने लगा है। पिपराघाट में नदी पीडब्ल्यूडी की सड़क को काट रही है। यहां भी बांध से सड़क की दूरी महज 10 मीटर अवशेष रह गई है। बचाव कार्य शून्य है। उक्त जगहों में कहीं भी बांध कटा तो यूपी के 15 गांवों सहित बिहार प्रांत के दर्जन भर गांव अस्तित्वविहीन हो जाएंगे और करीब डेढ़ लाख की आबादी प्रभावित होगी।

--

धन के अभाव में नहीं हो रहा बचाव कार्य : अधिशासी अभियंता

सेवरही : बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता भरत राम ने कहा कि धन की कमी है इस नाते बचाव कार्य शुरु नहीं हो पाया है। परियोजना बनाकर शासन को भेजा गया है, पर अभी तक परियोजना स्वीकृत नहीं हुई है।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप