कुशीनगर: वर्षों से बिना किसी कर के कार्य करती चली आ रही ग्राम पंचायतें भी अब टैक्स के दायरे में होंगी। विकास के लिए सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों को मिलने वाली सभी तरह के धनराशि के भुगतान के साथ अलग-अलग दर का जीएसटी देना होगा। गावों में विकास कराने के लिए राज्य वित्त व चौदहवां वित्त से मिलने वाली संपूर्ण धनराशि पर भी जीएसटी देना होगा। इन वित्त आयोग के धनराशि से होने वाले विकास कार्यों के स्टीमेट में ही जीएसटी शामिल रहेगा। सरकार ने विकास कार्य में लगने वाले ईंट तथा बि¨ल्डग मैटेरियल पर भी जीएसटी का अलग-अलग रेट निर्धारित किया है। मिटटी से बने ईंट पर पांच फीसद तथा बि¨ल्डग मैटेरियल अथवा सीमेंट से बने ईंट पर 12 फीसद जीएसटी ग्राम पंचायतों को अब देना होगा। राज्य व केद्र सरकार की ओर से मिलने वाली कुल धनराशि से होने वाले विकास में पांच से 12 फीसद धनराशि जीएसटी में कट जाएगी। इससे गांवों में उतने पैसे का विकास कार्य कम हो जाएगा। परियोजनाओं के स्टीमेट में ही जीएसटी शामिल होगा। इसमें कार्य करने वाले मजदूर इस व्यवस्था से बाहर होंगे। डीआरडीए के अवर अभियंता केके मिश्रा ने बताया कि जीएसटी से कटने वाला पैसा बिल से ही कटेगा जो ग्रामसभा या ब्लाक में नही रहेगा। इसे एक सप्ताह में ब्लाक के बीडीओ उसके हेड में जमा कराएंगे।