कुशीनगर : बीते दो दिनों से हो रही बारिश ने तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के एपी बांध व अमवाखास बांध को नारायणी नदी की बाढ़ से बचाने के लिए सिचाई विभाग द्वारा कराए गए कार्य के गुणवत्ता की पोल खोल दी है। हालांकि, सोमवार को पानी का डिस्चार्ज महज 4700 क्यूसेक दर्ज किया गया , लेकिन बारिश के कारण बाघाचौर गांव के सामने कराया गया रिवेटमेंट का कार्य, किमी 12.500 बाघाचौर से किमी 13.50 नोनियापट्टी तक कराया गया रिवेटमेंट कार्य दब गया है। इससे बांध पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

ग्रामीणों का आरोप है जिस समय कार्य किया जा रहा था उस समय नीचे बोरी भरकर सिर्फ एक मीटर पत्थर की पाइलिग का कार्य किया गया। इसी तरह अमवाखास बांध के किमी 01 बरवापट्टी, किमी 8.600 से किमी 900 बरवापट्टी संवेदनशील है। यहां बचाव कार्य जारी है। एसडीओ एसके प्रियदर्शी ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र में बारिश नहीं होने से पानी का डिस्चार्ज काफी कम है। वाहनों के आवागमन से क्षतिग्रस्त पचास प्रतिशत बांधों की मरम्मत हुई है। फ्लड फाइटिग के नाम पर कोई बजट नहीं आया है। 15 जून के बाद मानसूनी बरसात होने पर अगर बांध टूटता है तब बजट आता है। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता एमके सिंह ने कहा कि जहां-जहां दबाव है वहां पर काम चल रहा है। बांध पूरी तरह से सुरक्षित है कोई खतरा नहीं है। विभाग द्वारा प्रस्तावित कार्य कराया जा रहा है। जिले के सभी बांध सुरक्षित हैं। अभी खतरे जैसी कोई बात नहीं है।

बाढ़ के संभावित खतरे को लेकर निरीक्षण

खड्डा के एसडीएम अरविद कुमार ने सोमवार दोपहर पीडब्ल्यूडी के जेई, बाढ़ खंड के एसडीओ व जेई के संग नारायणी नदी के तट पर स्थित गांव महादेवा व सालिकपुर में दौरा किया। बाढ़ की संभावना व कटान को लेकर मौका मुआयना किया।

बाढ़ से प्रभावित ग्रामीणों को लेकर सुरक्षित जगह की तलाश की गई। एसडीएम ने बताया कि बाढ़ के समय सालिकपुर महादेवा गांव के लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाने वह उनके भोजन की व्यवस्था के लिए जगह का चयन किया गया है। इसके साथ ही गांव के सटे गुजरने वाली नदी की स्थिति देखी।

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