कुशीनगर: महिषासुर एक असुर था। उसने ब्रह्माजी की तपस्या करके कई वरदान हासिल किया था। देवताओं ने मां दुर्गा की स्तुति करके महिषासुर से छुटकारा पाने की प्रार्थना की थी। देवी दुर्गा ने महिषासुर से नौ दिनों तक दिन-रात युद्ध किया और दसवें दिन महिषासुर का वध किया। यह बातें फाजिलनगर स्थित काली मंदिर परिसर में चल रहे नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन गुरुवार की रात में महिषासुर वध की कथा का रसपान कराते हुए कथा वाचक स्वामी दिव्य सागर ने कही। कहा कि साधना से ही मनुष्य को मुक्ति मिल सकती है। जब-जब पृथ्वी पर असुरों का दुराचार बढ़ा तब-तब शक्तियां अवतरित होकर उसका नाश कर धरती को मुक्त कराती हैं। कथा का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया। दिनेश सिंह, रामविलास सिंह, हीरालाल गुप्ता, रितेश जायसवाल, प्रधान पुष्पा सिंह, उमा सिंह, सुनैना शाही, धर्मेंद सिंह, अशोक सिंह, गुड्डू चौहान, संदीप सिंह, ऋषि चौहान आदि उपस्थित रहे।

Posted By: Jagran

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