कुशीनगर: 15 दिसंबर से शुरू हो रही यूपी बोर्ड की प्रयोगात्मक परीक्षाओं की तैयारी को लेकर जिम्मेदार अब सजग हुए हैं और शेष नौ दिन में वर्ष भर के प्रैक्टिकल का कोटा पूरा कराने में तत्पर हैं। यदि यह तत्परता पूरे साल बरती गई होती तो न बच्चों में घबड़ाहट होती न ही परीक्षक के सामने दिक्कत। आनन-फानन बच्चों को लैब में ले जाकर स्लाइड थमाए जा रहे हैं तो रसायनों के विलय के बाद बदल रहे रंग की पहचान कराई जा रही है। गैस की पहचान कराने वाले टिप्स दिए जा रहे हैं।

नगर समेत जिले के विभिन्न नामचीन कालेजों में नामांकन के लिए होड़ लगती थी। अब ऐसा नहीं है। प्रयोगशाला में संसाधन नाम मात्र के रह गए हैं तो प्रैक्टिकल के प्रति रुचि भी घटी है। ग्रामीण क्षेत्रों के हालात बदतर हुए हैं। प्रयोग कराने वाले लैब सहायक के पद खाली हैं। विज्ञान के शिक्षक ही बच्चों को प्रैक्टिकल करवाते हैं। कभी यह सामान नहीं तो कभी वह नहीं।

12वीं के राम नयन ने कहा कि लैब के साप्ताहिक टर्न का पालन नहीं किया जाता। कभी-कभी तो महीनों बाद लैब में जाने का अवसर मिलता।

12वीं की अल्का ने कहा कि प्रयोगशाला में रसायन व भौतिक विज्ञान के उपकरणों का अभाव है। टर्न पर भी प्रैक्टिकल कराने के लिए कहना पड़ता है।

जिला विद्यालय निरीक्षक, कुशीनगर उदय प्रकाश मिश्र ने कहा कि यूपी बोर्ड की प्रयोगात्मक परीक्षाएं 15 दिसंबर से शुरू हो रही हैं। बच्चों को स्कूलों में कराए गए प्रैक्टिकल का रिवीजन करवाया जा रहा है। जहां भी लापरवाही पाई जाएगी सीधे कार्रवाई की जाएगी।

Posted By: Jagran

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