कुशीनगर: सरकार की प्राथमिकताओं में शुमार ग्रामीणों की स्वास्थ्य सुरक्षा तमकुही विकास खंड के ग्राम सपही टड़वा में जिम्मेदारों की उदासीनता की भेंट चढ़ गई है। यहां भवन के अभाव में होम्योपैथिक अस्पताल दो किमी. दूर दूसरे गांव में स्थित बीज विपणन केंद्र में तथा आयुर्वेदिक अस्पताल पंचायत में संचालित हो रहे हैं। दोनों अस्पतालों में वर्षों से चिकित्सकों की तैनाती न होने से फार्मासिस्टों के भरोसे ग्रामीणों का इलाज हो रहा है।

यह गांव पूर्व में आंबेडकर गांव भी रह चुका है। यहां मुसहर और दलित वर्ग की बहुलता है। ग्रामीणों के इलाज के लिए गांव में आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक अस्पताल स्थापित हैं, लेकिन दोनों अस्पतालों का अपना भवन न होने के चलते पंचायत भवन में संचालित होता है। यहां मरीजों की भीड़ अस्पताल की महत्ता को दर्शाती है, लेकिन कुछ वर्षों से चिकित्सकों की तैनाती न होने से फार्मासिस्ट को ही चिकित्सक की जिम्मेदारियों का निर्वहन करना पड़ता है।

इससे भी खराब स्थिति राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय की है। भवन विहीन इस चिकित्सालय को गांव में जमीन भी उपलब्ध नहीं है। इसके चलते अस्पताल गांव के केंद्र से दो किमी दूर ग्राम पंचायत बरवा राजपाकड़ के सीताराम चौराहा स्थित खाद व बीज वितरण केंद्र में किराये पर संचालित है। ग्रामीणों ने बताया कि गंभीर बीमारियों की दशा में ग्रामीण तमकुहीराज, सेवरही या कसया जाने को मजबूर हैं। जिला पंचायत सदस्य मनोज गुप्ता, प्रधान सीमा गौतम, प्रतिनिधि विजय भारती, रामसकल यादव, भोला गोंड, रामबचन गुप्ता, विजय गोंड आदि ने दोनों अस्पतालों के भवन स्थापना व चिकित्सकों के तैनाती की मांग की है।

Posted By: Jagran

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