कुशीनगर: विकास खंड दुदही के अमवाखास बांध के किनारे रहे बरवापट्टी के कुछ टोले वर्ष 1984 व 2002 में कटान की वजह से नदी की धारा में विलीन हो गए। जिससे करीब दो सौ परिवारों के लोग बेघर हो गए। प्रशासन द्वारा भूमि उपलब्ध करा कर डेढ़ सौ परिवारों को तो बसा दिया गया, लेकिन 50 परिवार विस्थापन से वंचित रह गए। वे आज तक बांध पर शरण लिए गर्मी, जाड़ा व बरसात झेलते आ रहे हैं। एक पूर्व वे मुख्यमंत्री के जनता दरबार में उपस्थित होकर गुहार लगाए थे। बाढ़ पीड़ितों की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने इन्हें भूमि उपलब्ध करा बसाने का प्रशासन को निर्देश दिया। डीएम ने एसडीएम तमकुहीराज को तत्काल सभी पीड़ित परिवारों की सूची उपलब्ध करवाने का निर्देश देने के साथ ही हिदायत भी दी की किसी तरह की धांधली नहीं होनी चाहिए। आठ माह में जांच पड़ताल कर तहसील प्रशासन ने 42 लोगों के नाम से आवासीय पट्टा तो दे दिया, लेकिन अब तक भूमि पर कब्जा न मिलने से सभी परिवार अमवाखास बांध पर खानाबदोश की जिन्दगी जी रहे हैं। अंगद गुप्ता, धीरज, गुड्डू, केवली, शिवधारी, खजांची, ध्रुप, अनिल, राजू, रामसूरत, अशर्फी, हीरालाल, सुरेश, मैनेजर, विनय, उपेंद्र, मोहनी, कौशल्या आदि ने कहा कि काफी चक्कर काटने के बाद आवासीय भूमि तो मिली, लेकिन प्रशासन कब्जा नहीं दिला पाया। एसडीएम अरविद कुमार ने कहा कि बांध पर शरण लिए लोगों को भूमि आवंटित कर दी गई है। चुनाव आचार संहिता समाप्त होते ही कब्जा दिला दिया जाएगा।

Posted By: Jagran