कुशीनगर: बेहतर स्वास्थ्य की ¨चता हम सभी को है, खेलकूद को स्वास्थ्य के लिए जरूरी बताया जाता है। बावजूद इसके 25 वार्डों के नगर में केवल एक पार्क है। नागरिकों का कहना है कि नगर की आबादी करीब एक लाख है, इसके बाद भी जिम्मेदार सार्वजनिक पार्क का निर्माण कराना आवश्यक नहीं समझ रहे। पडरौना नगरपालिका का गठन आजादी मिलने के कुछ ही वर्ष हुआ था। उस समय नगर क्षेत्र में सरकारी भूमि भी थी, लेकिन पार्क के लिए प्रयास नहीं किया गया। आवास विकास कालोनी में एक छोटा सा पार्क है। जैसे-जैसे आबादी बढ़ी, कालोनियां बनती गईं और अब किसी भी मोहल्ले में पार्क बनाने लायक भूमि नहीं बची है। लोग रेलवे स्टेशन का प्लेटफार्म, जूनियर हाईस्कूल परिसर, यूएनपीजी कालेज का खेल ग्राउण्ड व मुख्य पश्चिमी गंडक नहर की पटरी पर टहलते हैं। पार्क के सवाल पर जनप्रतिनिधि चुप्पी साध ले रहे हैं। उनका कहना है कि पूर्व के जिम्मेदारों ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया, अब नगर में पार्क के लायक भूमि ही नहीं बची है।

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क्या कहते हैं नागरिक

-छावनी वार्ड पूर्वी की पीरावली देवी ने कहा कि नगर में पार्क का न होना जिम्मेदारों की उदासीनता का परिचायक है। पार्क होता तो खेलने व टहलने में मदद मिलती।

- रेनू ने कहा कि एक लाख की आबादी के लिए एक मोहल्ले में पार्क है। अन्य मोहल्लों के लोगों को खेलने व टहलने में दिक्कत होती है।

-संदीप वर्मा ने कहा कि करीब दो दशक पूर्व तक नगर क्षेत्र में पार्क बनाने के लिए भूमि थी। तत्कालीन जनप्रतिनिधियों ने ध्यान नहीं दिया, अब भूमि का रोना रो रहे हैं।

-सौरभ कुमार ने कहा कि नगर में पार्क बनाने के प्रति शुरू से ही जिम्मेदार उदासीन रहे। पूर्व में जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रयास किया गया होता तो दिक्कत नहीं होती।

-नपाध्यक्ष विनय जायसवाल ने कहा कि मौजूदा समय में कोई जगह नहीं बची, जहां पार्क बनवाया जा सके। सीमा विस्तार के बाद पार्क की व्यवस्था की जाएगी।

-शमशेर मल्ल ने कहा कि कालोनियां बनाते समय ध्यान दिया गया होता तो पार्क के लिए भूमि आरक्षित रहती। उस समय किसी ने ध्यान नहीं दिया।

Posted By: Jagran