संसू, पुरखास : यमुना का जल स्तर तेजी से बढ़ रहा है। इससे चायल व मंझनपुर तहसील क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों के करीब पानी पहुंच गया है। इससे ग्रामीण काफी परेशान हैं। कई किसानों की फसल डूब गई है। इससे उन्हें हजारों का नुकसान हुआ है। बढ़ रहे जल स्तर से परेशान ग्रामीण अपने घरों से खाद्य सामग्री व कपड़े निकाल कर ऊंचे स्थान पर ले जा रही है।

चायल क्षेत्र का पिपरहटा, मल्हीपुर, नंदा का पूरा व मंझनपुर तहसील क्षेत्र के दलेलागंज, जमुनापुर, घोघ का पूरा गांव के करीब पानी पहुंच गया है। क्षेत्रीय लोगों की मानें तो यमुना का बढ़ रहा जल स्तर न रुका तो आधा दर्जन गांव में पानी घुस जाएगा। यमुना में आ रही बाढ़ को लेकर पिपरहटा गांवों के लोग परेशान हैं। यमुना के बढ़े जल स्तर की सूचना पर चायल एसडीएम अनिल चतुर्वेदी ने सोमवार को राजस्व टीम पिपरहटा गांव भेजकर वहां का जायजा लिया। बाढ़ से किसी को व्यक्ति को नुकसान न हो। इसके मद्देनजर जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट है। युमना के पानी से डूब गई फसल

यमुना के बढ़े जल स्तर पिपरहटा गांव के भंवर ¨सह, देवराज, सुन्नालाल, सैकू, सुंदरलाल, राम औतार, राम आधार, रामआसरे आदि किसानों की अरहर, बाजरा व तिल की फसल डूबकर गई है। इससे किसानों को हजारों का नुकसान हुआ है। फसल नष्ट होने की सूचना ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन को दिया है। किसानों की माने तो फसल नुकसान का मुआवजा नहीं मिला। दो जून की रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। सफाई कर्मचारी चला रहे बाढ़ चौकी

यमुना के बाढ़ प्रभावित गांव के लोगों को सुविधा देने के लिए डीएम के निर्देश पर तिल्हापुर स्थित जयभीम शिक्षण संस्थान में बाढ़ नियंत्रण चौकी बनाई है। यहां पर हल्का लेखपाल, राजस्व निरीक्षक, एडीओ पंचायत, ग्राम विकास अधिकारी, एएनएम, पशु चिकित्सक आदि की ड्यूटी लगाई है। ग्रामीणों की माने तो इन दिनों वहां पर सफाई कर्मी की जाते हैं। जिन कर्मचारियों को बाढ़ चौकी में तैनात किया है। तेजी से बढ़ रहे जलस्तर ने अब तक एक दर्जन से अधिक किसानों की 40 बीघे से अधिक फसल डूब चुकी है जिससे ग्रामीणों के साथ साथ मवेशियों के जीवन के लिए संकट उत्पन्न हो सकता है।

- राजेंद्र कुमार

बाढ़ आने पर कई प्रकार के जहरीले जंतुओं ग्रामीणों के घरों में आ गए हैं इनसे बचाव के लिए प्रशासन को कोई ठोस उपाय करना चाहिए।

- अमित ¨सह

तीन वर्ष पहले यमुना में आई बाढ़ से ग्रामीणों की बोई गई फसल खराब हो गई थी। गौशाला में रखा भूसा भी खराब हो गया था। जिससे मवेशियों के साथ साथ लोगो को बहुत परेशानी उठानी पड़ी थी।

- कमता प्रसाद

बाढ़ आने पर गंदगी से बीमारी खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। ग्रामीणों के साथ मवेशियों में खुरपका, मुंहपका पशु पीड़ित हो जाते हैं।

- भंवर ¨सह यमुना के बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने नाव की व्यवस्था, राहत कैंप, जनरेटर, जरूरी दवाओं के साथ डॉक्टर की तैनाती के साथ तराई के गांवों की निगरानी के लिए गठित टीमें लगाई हैं। जो 24 घंटे बाढ़ की निगरानी कर प्रशासन को अवगत कराती रहेंगी।

- अनिल कुमार चतुर्वेदी, एसडीएम चायल

Posted By: Jagran