कौशांबी में पितृ पक्ष श्राद्ध: गंगा घाटों पर उमड़ी भीड़, पितरों को तृप्त करने के लिए किया तर्पण
कौशांबी के गंगा घाटों पर पितृ पक्ष की द्वितीया तिथि पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिन्होंने ब्रह्म मुहूर्त से ...और पढ़ें

कड़ा के कुबरी गंगा घाट पर तर्पण करते लोग। जागरण
HighLights
कौशांबी के गंगा घाटों पर पितृ पक्ष में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।
पितरों की शांति हेतु श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया गया।
पुरोहितों के अनुसार पितृ ऋण से मुक्ति दिलाते हैं ये कर्मकांड।
जागरण संवाददाता, कौशांबी। पितृ पक्ष की द्वितीया तिथि पर सोमवार को गंगा घाटों और तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। ब्रह्म मुहूर्त से ही लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने पहुंचने लगे। गंगा तट पर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूर्वजों का स्मरण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
कड़ाधाम के कुबरी, संदीपन, काकराबाद और पल्हाना गंगा घाटों पर सुबह से ही श्राद्ध कर्म की तैयारियां शुरू हो गई थीं। तीर्थ पुरोहितों की देखरेख में श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और शुद्ध वस्त्र धारण कर पितरों का तर्पण किया।
दक्षिण दिशा की ओर मुख करके कुशा, तिल, जल और गाय के दूध से तर्पण एवं पिंडदान किया गया। पुरोहित आचार्य पं जयराम शुक्ल बताते हैं कि पितृ पक्ष में किए गए श्राद्ध और तर्पण का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इन कर्मकांडों से पितरों को तृप्ति मिलती है और उनका आशीर्वाद परिवार को प्राप्त होता है।
हर व्यक्ति पर होते हैं तीन ऋण
पुरोहित आचार्य पं जयराम शुक्ल के अनुसार सनातन धर्म में किसी भी व्यक्ति के ऊपर तीन तरह के ऋण होते हैं। जिसमें पहला देव ऋण, दूसरा ऋषि ऋण और तीसरा पितृ ऋण होता है। श्राद्ध कर्म के जरिए हम अपने पितृ ऋण से निवृत होते हैं और पितरों को जल देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इसलिए 15 दिन अलग-अलग तरह के श्राद्ध की परंपरा है। इसी आस्था के साथ पितृ पक्ष के 15 दिनों तक श्राद्ध व तर्पण का विधान निहित किया गया है।
