कौशांबी। पर्याप्त बारिश न होने व भूगर्भ जल के लगातार दोहन की वजह से जनपद का भू जल जलस्तर नीचे गिरता जा रहा है। इससे केंद्र सरकार ने जिले के छह विकास खंड क्षेत्रों को वर्ष 2010 में डार्क जोन घोषित कर दिया है। जल स्तर बढ़ाने और जल संचय के लिए सरकार ने मनरेगा के तहत तालाबों की खोदाई व ग्राम पंचायतो में पंचायतीराज विभाग सोकपिट का निर्माण कराने का निर्देश दिया है, लेकिन जिले के कई तालाबों में अवैध कब्जा है। जिसे मुक्त कराने के लिए प्रशासन की ओर से ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है । यदि तालाबों को अवैध कब्जे से मुक्त कराकर खोदाई करा दी जाए तो जल संरक्षण को संजीवनी मिल सकती है।

पांच दशक पीछे की बात करे तो गांवो में पेयजल का सबसे बड़ा स्त्रोत कुआं और तालाब ही हुआ करते थे। इन तालाबो के माध्यम से वर्षा का जल धरती की कोख में समा जाता था और कुओं में हमेशा पानी भरा रहता था ।लोग अपनी जरूरत के हिसाब से ही पानी खर्च करते थे ।धीरे - धीरे हैंडपंपों और नलकूप के जरिए लोग पानी का अंधाधुंध बर्बादी कर रहे है। जिसका खामियाजा हमारी आने वाली पीढि़यों को भुगतना पड़ सकता है। पंचायती राज्य विभाग द्वारा जल संरक्षण के लिए सोकपिट आदि बनाकर जल संरक्षण के लिए कार्य किया जा रहा है। जो नकाफी साबित हो रहा है ।जनपद में लगातार गिर रहे जलस्तर को सुधारने में तालाबों की बड़ी भूमिका हो सकती है । मंझनपुर तहसील की बात करे तो 314 राजस्व गांवों में राजस्व रिकार्ड में 14249 गाटो में 1893.0656 हेक्टेयर (8 हजार तीन सौ तीन बीघा) तालाबी नंबर दर्ज है। जिसमे म्योहर ,टेवा, सरसवां, पाता, पूरबशरीरा ,अंधावा, आदि गांवोंमें सैकड़ो बीघे से अधिक तालाबी रक्बों में अवैध कब्जा है। कई तालाबों में मकान बना लिया गया है। तो खेती की जा रही है। प्रशासन द्वारा अगर तालाबो को अवैध कब्जे से मुक्त करवाकर उनको वास्तविक स्वरूप दे दिया जाए तो बारिश के पानी का सही तरीेके से संरक्षण किया जा सकता है और जल संरक्षण को संजीवनी मिल सकती है।

इस संबंध में एसडीएम मंझनपुर प्रखर उत्तम का कहना है कि तालाबों को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए तहसील प्रशासन को निर्देश दिया गया है। यदि मंझनपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायतों के तालाबों पर अवैध कब्जा है तो उसे मुक्त कराया जाएगा।

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