कौशांबी। ग्राम पंचायत सचिव के तबादले से गांवों में चल रहे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। एक गांव से कई बार ग्राम विकास अधिकारियों के बदलने की वजह से विकास निधि का खाता खुलने में समय लग रहा है। जिससे व्यवस्था बाधित हो रही है। निर्माण कार्य के साथ ही बेसिक जरूरतों के कार्य भी प्रभावित हैं।

जिले में हर विकास खंड में सचिवों का स्थानांतरण हुआ है। नेवादा व मंझनपुर ब्लाक के सचिव की बात करें तो इन दोनों ब्लाक के सचिव बाहर जाने के लिए तैयार नहीं है। वह ब्लाक में ही बने रहने के लिए जोर लगा रहे हैं। इसी प्रकार सिराथू ब्लाक में सचिवों के स्थानांतरण से उठा पटक मची है। सेक्रेटरी रमापति यादव व मार्तंड सिंह का स्थानांतरण एक माह पहले हो चुका है। इनके जाने के बाद सचिवों के गांव में परिवर्तन हुआ। ग्राम पंचायत सेलरहा पश्चिम में रहे सचिव सुरेश मौर्य को हटाकर सतीश चौधरी को यहां का चार्ज दिया गया। इसके साथ ही रमापति यादव के पास रहे कशिया पश्चिम गांव का चार्ज भी सतीश चौधरी को दिया गया। वह गांव में पहुंचकर वहां के विकास कार्यों का संचालन कर रहने लगे। बैंक खाता समेत अन्य जिम्मेदारी उन्होंने संभाल ली थी। करीब दस दिन बाद सतीश चौधरी समेत ब्लाक क्षेत्र में तैनात रहे सचिव अर्चना सरोज, वीरेंद्र कुमार का तबादला दूसरे ब्लाक में कर नए सचिवों की तैनाती कर दी गई। बार-बार गांवों में सचिवों के बदलने की वजह से विकास के काम रुक रहे हैं। तबादले में हुई राजनीति

सचिवों को एक ब्लाक से दूसरे ब्लाक में स्थानांतरण कर कागजी कोरम जरूर पूरा कर लिया गया, लेकिन इसके बाद भी एक गांव में सालों से डटे सचिव को तबादला नीति प्रभावित नहीं कर सकती। एक ही गांव में पांच-पांच साल से सचिव डटे रह गए। इनकी ओर किसी ने ध्यान ही नहीं दिया। कुछ सचिव स्थानीय राजनीति में इस प्रकार सम्मलित हैं तो उन पर तबादला जैसी नीति का असर नहीं होता। साल दर साल उनके गांव बने रहते हैं। सिराथू ब्लाक क्षेत्र के तीन सचिव करीब पांच सालों से एक ही गांव में तैनात हैं।

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