कौशांबी। महेवाघाट थाना क्षेत्र के शाहपुर गांव स्थित स्कूल में भेदभाव करते हुए अनुसूचित जाति के छात्रों की पिटाई कर अपने भतीजे का पैर छुआने वाले आरोपित के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। एसपी के आदेश पर कार्रवाई के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शाहपुर निवासी पवन कुमार ने बुधवार को ग्रामीणों के साथ पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर में प्रदर्शन किया था। शिकायती पत्र देकर एसपी को बताया कि वह अनुसूचित जाति का व्यक्ति है। उसका बेटा गांव के ही म़ृत्युंजय प्रताप सिंह जूनियर विद्यालय में कक्षा छह का छात्र है। उसके साथ में गांव के अनुसूचित जाति के दो अन्य बच्चे भी पढ़ाई करते हैं। नौ अक्टूबर को गांव का आयुष सिंह आया और तीनों बच्चों के बैग को फेंकते हुए उसी स्थान पर बैठ गया। इसे लेकर बच्चों में विवाद हो गया। आयुष सिंह घर पहुंचा और अपने दादा बेलाहा सिंह को घटना की जानकारी दी। पवन का आरोप है कि इस पर बेलाहा सिंह स्कूल पहुंचे और तीनों बच्चों की पिटाई करते हुए जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। इसके बाद तीनों छात्रों से आयुष का पैर छुआ कर माफी मंगवाया। मामले की जानकारी होने पर ग्रामीण आक्रोशित हो गए। शिकायत थाने में की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इससे आहत ग्रामीणों ने एसपी से गुहार लगाई। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस ने बेलाहा सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया। तमंचे की नोक पर परिवार को पीटा, तोड़फोड़

पिपरी थाना क्षेत्र के सेंवढ़ा का मजरा पठन पुरवा गांव में पुरानी रंजिश को लेकर कुछ लोगों ने तमंचे की नोक पर परिवार को बेरहमी से पीटा और गृहस्थी का सामान तोड़फोड़ दिया। मामले में पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर पांच लोगों के खिलाफ बुधवार को केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पठन पुरवा निवासी विश्वनाथ मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करता है। उसका गांव के ही कलेसर से पुरानी रंजिश चली आ रही है। इसे लेकर अक्सर विवाद की स्थिति बनी रहती है। विश्वनाथ का कहना है कि 25 अगस्त को कलेसर अपने साथी जगेश्वर, अमित व पप्पू के साथ आया और बेवजह गाली-गलौज करने लगा। विरोध करने पर हमलावरों ने घर में घुसकर पूरे परिवार की पिटाई की। साथ ही विश्वनथ की कनपटी पर तमंचा सटाकर गोली मारने की धमकी देते हुए गृहस्थी का सामान तहस-नहस कर दिया। ग्रामीणों के हस्तक्षेप पर हमलावर धमकी देते हुए भाग निकले। विश्वनाथ का आरोप है कि मामले की शिकायत के बावजूद न तो थाने में कार्रवाई हुई और न ही आला अफसरों ने सुनवाई की। इस पर पीड़ित ने अदालत का सहारा लिया। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने नामजद आरोपितों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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