जासं, कौशांबी : मोती नाम सुनते ही लोगों की आंखों में चमक आ जाती है। अब इस मोती का उत्पादन कौशांबी जिले के किसान करेंगे। इसके लिए उनको प्रशिक्षण दिया जाएगा। कृषि विज्ञान केंद्र व मत्स्य पालन विभाग संयुक्त रूप से इसके लिए प्रयास कर रहा है। जनवरी के अंतिम सप्ताह में 40 किसानों को प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर में मोती उत्पादन के बारे में जानकारी लेने के लिए भेजा जाएगा। विभाग किसानों को भेजने की तैयारी में जुटा है।

किसानों की आय में वृद्धि के लिए विभाग की ओर से तरह-तरह के प्रयोग हो रहे हैं। खेती के साथ किसान तालाब का निर्माण कर मत्स्य पालन के जरिए अपनी आय में वृद्धि की कोशिश में जुटे हैं। वहीं, अब किसानों के लिए मत्स्य विभाग ने मोती उत्पादन की योजना बनाई है। जिले के करीब 40 किसानों ने मोती उत्पादन से जुड़ा प्रशिक्षण लेने के लिए विभाग से संपर्क किया है। यह किसान करीब दो से ढाई हेक्टेयर क्षेत्रफल में मोती उत्पादन के लिए तैयार हैं। इन किसानों को प्रशिक्षण दिया जाना है। इसके लिए मत्स्य विभाग व कृषि विज्ञान केंद्र संयुक्त रूप से प्रयास करते हुए मोती उत्पादन का प्रशिक्षण देने की योजना पर बीते तीन माह से काम कर रहा है। इसके लिए विभाग ने विभिन्न प्रकार की जानकारी जुटाई है, जो एक बुकलेट के रूप में तैयार की जा रही है। इसके साथ ही माह के अंत तक किसानों का एक दल प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर में हो रहे मोती उत्पादन के बारे में जानकारी करने के लिए जाएगा। इसके बाद उनको नियमित प्रशिक्षण देकर मोती उत्पादन की बारीकियों से अवगत कराया जाएगा।

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प्रशिक्षण तक होगी विभाग की भूमिका

मोती उत्पादन मत्स्य विभाग से जुड़ा कार्य नहीं है फिर भी वह किसानों की रुचि को देखते हुए प्रशिक्षण दिलाएगा। फिलहाल विभाग के पास इस कार्य के लिए किसी प्रकार का बजट नहीं है। किसानों को अपनी जरूरत के अनुसार धन लगाकर उत्पादन के लिए सीप आदि लाना होगा। विभाग उनको केवल तकनीकी सहयोग देगा, जो उनकी आय को बढ़ाने में मददगार साबित होगा।

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जिले के 40 किसान मोती उत्पादन से जुड़ा काम करने को तैयार है। उनको जल्द प्रशिक्षण दिया जाएगा। किसानों को इस बात की जानकारी दी जा चुकी है कि यह उत्पादन उनको खुद के रुपये से शुरू करना होगा। इसके लिए किसी प्रकार का बजट नहीं है। विभाग तकनीकी सहयोग में उनकी मदद करेगा।

- सुनील कुमार सिंह, मत्स्य विकास अधिकारी

Edited By: Jagran