कासगंज, संजय धूपड़: कल-कल करती पवित्र भागीरथी गंगा। भगवान वाराह भगवान का स्वर्गारोहण स्थल। मंदिरों की कतारें। वर्ष भर धार्मिक उत्सवों और मेलों का आयोजन। विभिन्न राज्यों से आते श्रद्धालु। इन्हीं विशेषताओं के आधार पर सोरों सूकर क्षेत्र को तीर्थस्थल का गौरव प्रदान करने की मांग 30 साल पहले ही उठ चुकी थी। समय गुजरने के साथ ही आंदोलन ने अलग-अलग रूप लिए।

वर्ष 1991 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। मुख्यमंत्री कल्याण सिंह थे। स्थानीय कोठीवाल आढ़तिया महाविद्यालय में हिदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. राधाकृष्ण दीक्षित भाजपा कार्यकर्ताओं को लेकर मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से मिले और उन्हें सोरों को तीर्थस्थल घोषित करने की मांग का ज्ञापन सौंपा। उद्देश्य ये था कि ये मांग पूरी होने पर क्षेत्र का विकास हो जाएगा। बकौल डा. दीक्षित, मुख्यमंत्री ने तब कहा था कि चित्त में तो है मगर वित्त में नहीं। कुछ समय बाद डा. दीक्षित एक प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रदेश के तत्कालीन पर्यटन मंत्री कलराज मिश्र से मिले। तब सोरों के विकास के लिए उन्होंने प्रशासन को 50 लाख रुपये अवमुक्त कर दिए थे। लेकिन तीर्थ स्थल की घोषणा नहीं हो पाई।

इसके बाद समय-समय पर मांग तो उठती रही मगर, प्रभावी आंदोलन नहीं हो पाया। दो माह से इस मांग ने अचानक जोर पकड़ लिया। 16 अगस्त को सोरों सूकर क्षेत्र संयुक्त विकास मोर्चा ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन तत्कालीन डीएम सीपी सिंह को दिया था। 20 दिन तक पोस्टकार्ड अभियान चलाया गया। सांकेतिक धरना प्रदर्शन, बाजार बंदी भी हुई। जन जागरण अभियान चलाया गया। भूख हड़ताल की गई। 24 अक्टूबर से आमरण अनशन शुरू हो गया। अनशन के 72 घंटे बाद सार्थक परिणाम आए और गुरुवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर सोरों को तीर्थ स्थल घोषित करने के निर्णय की जानकारी दी। सार्थक हुए हैं सभी के प्रयास

तीर्थ की इस मांग में समाज के हर वर्ग ने इसमें भागीदारी दी है। दो वर्ष पूर्व आरएसएस के प्रांत प्रचारक डा. हरीश रौतेला ने सूकर क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखकर यहां पंचकोसीय परिक्रमा की घोषणा की थी। आरएसएस, सांसद, विधायक, पार्टी कार्यकर्ताओं, व्यापारियों और आमजन की बड़ी सहभागिता रही है। तत्कालीन डीएम सीपी सिंह के प्रयासों को भी नहीं भुलाया जा सकता। सभी जनप्रतिनिधियों के प्रयास और नगर के तीर्थ पुरोहितों और युवाओं की मांग के अनुरूप उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने आज सोरों शूकर क्षेत्र को तीर्थ की मान्यता देकर बहुत बड़ा न्याय किया है। सभी जानते हैं कि सूकरक्षेत्र बहुत प्राचीन तीर्थ स्थान है। संपूर्ण देश से यहां लाखों लोग अपने धार्मिक अनुष्ठानों की पूर्ति करने के लिए आते हैं, लेकिन उन्हें प्राथमिक सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पाती। आज यह समय आ गया है कि उप्र सरकार ने सोरों को तीर्थ स्थान की मान्यता प्रदान कर दी है। जिसकी घोषणा के पश्चात पूरे जनपद में हर्ष की लहर दौड़ गई है।

-डा. राधाकृष्ण दीक्षित

एसो. प्रोफेसर, कोठीवाल आढ़तिया महाविद्यालय, कासगंज

Edited By: Jagran