सोरों, संवाद सूत्र: तीर्थस्थल की मांग का दायरा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। व्यापारियों ने भी एक स्वर में सोरों को तीर्थस्थल घोषित करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि तीर्थ बनने के बाद क्षेत्र के विकास के साथ व्यापारिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

प्रत्येक धार्मिक पर्व पर सोरों आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या लाखों में होती है। यहां राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और पंजाब के तीर्थयात्री अनवरत रूप से आते रहते हैं। क्षेत्र काफी पिछड़ा हुआ है। व्यापारिक ²ष्टिकोण से भी यह क्षेत्र पीछे है। व्यापारियों का कहना है कि यदि सरकार आधिकारिक तौर पर तीर्थ स्थल की घोषणा कर दे तो विकास के नए आयाम शुरू हो जाएंगे। तीर्थ स्थल की घोषणा होने के बाद सोरों ही नहीं आस-पास के क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। सरकारी योजनाओं का समय-समय व्यापारियों को लाभ प्राप्त होगा। यहां के पौराणिक महत्व को देखते हुए तीर्थस्थल घोषित किया जाना चाहिए।

- पवन अग्रवाल, व्यापारी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की श्रेष्ठ धार्मिक नगरी सूकर क्षेत्र सोरों सरकारी तौर पर तीर्थस्थल घोषित न होने से काफी पिछड़ा हुआ है। जबकि पुराणों में यहां की मान्यता का विशेष महत्व है। व्यापार को बढ़ावा देने के लिए तीर्थस्थल घोषित होना जरूरी है।

- विक्की तिवारी, व्यापारी

धार्मिक नगरी होने के कारण सारों में कंठी माला, गंगाजली एवं कांवड़ का बड़ा व्यापार होता है। व्यापारियों को इससे अधिक मुनाफा नहीं हो पाता है। तीर्थस्थल घोषित हो जाए तो उद्योग धंधों को बढ़ावा एवं लोगों को रोजगार मिलेगा।

- दुर्गा शंकर गुरु, व्यापारी जिला कासगंज का कुछ वर्षों पूर्व ही सृजन हुआ है। व्यापारिक ²ष्टिकोण से यह क्षेत्र काफी पिछड़ा है। जिलेभर के व्यापारी सोरों के तीर्थस्थल घोषित होने की आस लगाए बैंठे हैं। घोषणा होते ही यहां विकास के नए आयाम शुरू होंगे।

- विजय अग्रवाल, व्यापारी

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